14 साल पुरानी बात है जाने कैसे उत्तराखंड में विदेश से कबाड़ में आ गई थीं 555 मिसाइलें, अब हो रही है नष्ट जानिए पूरी कहानी ओर 20 हज़ार की आबादी को राहत देन वाले को

उत्तराखंड में विदेश से कबाड़ में आ गई थीं 555 मिसाइलें, जानिए पूरी कहानी

उत्तराखंड में विदेश से कबाड़ में कैसे आ गई थीं 555 मिसाइलें आज आपको इसकी पूरी कहानी हम बता रहे है।
उत्‍तराखंड में एक जगह ऐसी है जहां विदेश से मंगाए जा रहे कबाड़ में 555 मिसाइलें आ गई थीं। जी हा ओर स्‍क्रैप को काटने के दौरान मिसाइल के ब्‍लास्‍ट होने पर श्रमिक की मौत भी हो गई थी।. 

ख़बर विस्तार से नैनीताल उत्‍तराखंड में एक जगह ऐसी है जहां विदेश से मंगाए जा रहे कबाड़ में 555 मिसाइलें आ गई थीं। ये पूरा मामला उस समय सामने आया जब स्‍क्रैप को काटने के दौरान मिसाइल के ब्‍लास्‍ट होने पर श्रमिक की मौत हो गई। जिसके बाद फैक्‍ट्री प्रबंधन समेत पूरे उत्‍तराखंड में हलचल मच गई । 14 साल बाद अब सेना के जवान मिसाइलों को नष्‍ट कर रहे हैं। आखिर क्‍या है इसके पीछे की पूरी कहानी, आइए आपको बताते हैं।

पूरा मामला ये है कि
2004 में स्‍क्रैप में आई थीं मिसाइलें
दरसल मे काशीपुर स्थित एसजी स्टील फैक्ट्री में 21 दिसंबर 2004 को स्क्रैप में 555 मिसाइलें आ गई थीं। इसका खुलासा तब हुआ जब स्क्रैप को काटने के लिए मशीन में लगाया गया। इस दौरान एक मिसाइल के जोरदार ब्‍लास्‍ट होने से वहां काम कर रहे मजदूर की मौत हो गई। बाद में हुई जांच में यहां से 67 बड़ी और 488 छोटी मिसाइलें मिली थीं। तब बताया गया था कि स्टील फैक्ट्री में विदेशों से भी स्क्रैप आता था। जिसके बाद से न सिर्फ काशीपुर बल्कि पूरे उत्‍तराखंड में हड़कंप मच गया था। 

स्‍क्रैप से बरामद मिसाइलों को प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जसपुर की पतरामपुर पुलिस चौकी के पीछे जमीन में दबा कर रख दिया था।
2005 में आई थी एनएसजी।
मिसाइलों को नष्‍ट करने के लिए 7 जनवरी 2005 में एनएसजी की टीम जसपुर पहुंची थी। लेकिन उस वक्‍त मिसाइलों को निष्क्रिय करने का पूरा सामान नहीं होने से यह काम रुक गया था। बाद में इन मिसाइलों को जसपुर की पतरामपुर चौकी के पास जमीन में दफ़न कर दिया गया था। तब से समय समय पर इन मिसाइलों को डिस्पोजल करने की मांग होती रही।

ओर फिर 13 साल बाद स्‍वीकृत हुआ डिस्‍पोज करने का बजट
एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने पतरामपुर चौकी के पास दफ्न की गई मिसाइलों को डिस्पोजल करने संबंधी साजो-सामान खरीदने के लिए 4 दिसंबर 2017 को पुलिस मुख्यालय से पत्राचार किया। इसके बाद बजट स्वीकृत हुआ।
जिसके बाद
इलेक्ट्रिक डेटोनेटर नंबर 33, इग्नाईटर सैफ्टी फ्यूज इलेक्ट्रिक, कार्ड डेटोनेटिंग (कोडैक्स) और टीएनटी स्लैब (सीई) का इंतजाम केन्द्रीय शस्त्र भंडार 31 वीं वाहिनी पीएसी रुद्रपुर से किया गया है। पीईके 4 किलो एटीएस हरिद्वार से मांगा गया है। वहीं सेफ्टी फ्यूज नंबर 11 को 31वीं वाहिनी पीएसी/ 46 वीं वाहिनी एटीएस हरिद्वार/आईआरबी प्रथम ने उपलब्ध कराया है।

ओर सेना के बम निरोधक दस्ते ने ‘ऑपरेशन 555 पतरामपुर’ के तहत शुक्रवार को दूसरे दिन जमीन में दबी 190 मिसाइल निकाली। इसके बाद दो दिन में खोदाई कर निकाली गई 220 मिसाइलों को फीका नदी के किनारे में नष्ट किया। इस दौरान आधा किमी क्षेत्र से लोगों को हटा दिया गया था। मौके पर अफसर भी लगातार मौजूद रहे।
गुरुवार को बाराबंकी से आई आर्मी के काउंटर एक्सप्लोसिव डिवाइस यूनिट के कैप्टन विकास मलिक एवं उनकी टीम ने जेसीबी की मदद से गहरे गड्ढे में दबीं 30 मिसाइलें निकाली थी। शुक्रवार को सेना के जवानों ने खोदाई जारी रखते हुए 190 अन्य मिसाइल निकालीं। जवान इन्हें डंपर में चौकी क्षेत्र से करीब साढ़े चार किमी दूर अमानगढ़ गेट स्थित फीका नदी के किनारे ले गए। वहां सेना ने पांच गहरे गड्ढे बनाए थे। इस दौरान पूरा क्षेत्र डेंजर जोन घोषित था। दोपहर बाद करीब डेढ़ बजे कैप्टन मलिक के नेतृत्व में करीब सात सौ मीटर दूर से मिसाइलों को क्रमवार नष्ट किया गया। तेज धमाकों की आवाज दूर तक सुनीं गईं। कैप्टन विकास ने बताया कि जितनी भी मिसाइल निकाली जाएंगी, उन्हें रोजाना नष्ट कर दिया जाएगा। 

इस दौरान एएसपी डॉ. जगदीश चंद्र, कोतवाल अबुल कलाम, एसआइ वीरेंद्रं सिंह, उप प्रभारी वनाधिकारी जसपुर, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी काशीपुर भी मौके पर मौजूद रहे।

उत्तराखंड में 555 मिसाइल, 20 हजार की आबादी की सांसें बारूद के ढेर पर थी
मिसाइल वो नाम जिसके सुनते ही मन में तबाही का मंजर नजर आ जाता है और अगर एक साथ 555 मिसाइलें हो तो फिर सोचिये क्या हो सकता है। हम यहाँ बात कर रहे हैं दिसम्बर 2004 की उधमसिंहनगर के काशीपुर शहर में स्थित है एसजी स्टील फैक्ट्री जिसमे तब स्क्रैप आ गया था, अब जब इस स्क्रैप को काटा जा रहा था तो स्क्रैप में मौजूद एक मिसाइल फट गयी जिसके कारण मौके पर ही एक मजदूर की मौत हो गयी थी, इस फैक्ट्री में विदेशों से भी भारी मात्रा में स्क्रैप आता था और जांच के बाद पता चला कि पूरे क्षेत्र में 67 बड़ी और 488 और छोटी मिसाइल सक्रिय हैं जिसके बाद पूरे प्रशासन में हडकंप मच गया था। और अब पिछले 13 सालों से ये 555 मिसाइलें यहीं मौजूद थी जिसके कारण आस पास के 5 गांवों की लगभग 20 हजार की आबादी इन्ही मिसाइलों के ढेर पर जीने को मजबूर थी।

और पिछले 13 साल से लोग मौत के ढेर पर जीने के लिए इसलिए मजबूर थे क्यूंकि इतने सालों के बाद भी प्रशासन मिसाइल डिफ्यूज करने के लिए फंड की ब्यवस्था नहीं कर पाया था। और अब 5 गांवों के लोगों ने चैन की सांस ली है क्यूंकि 13 साल के लम्बे इन्तेजार के बाद मिसाइल डिफ्यूज करने के लिए फंड की ब्यवस्था हो गयी है। जनवरी 2005 में एनएसजी की टीम यहाँ आयी थी और तब मिसाइलों को निष्क्रिय करने का पूरा सामान न होने के कारण काम रुक गया था और मिसाइलों को जसपुर की पतरामपुर चौकी के पास निर्जन स्थान में जमीन के नीचे दबा दिया गया था। और तब से हमेशा इन मिसाइलों को डिफ्यूज करने की मांग होती रहती थी।

एसएसपी डॉ. सदानंद दाते ने दिसंबर 2017 को पुलिस मुख्यालय से इस बारे में पत्र लिखा जिसके बाद अब बजट स्वीकृत हुआ है और अब मिसाइलों को डिफ्यूज करने की जिम्मेदारी नेशनल सिक्योरिटी गार्ड(एनएसजी) को दी गयी थी और अब परिणाम आपके सामने है।

 

ओर ये सब कुछ सम्भव  हुवा   उद्यम सिंह नगर के        एसएसपी रहे    डॉ. सदानंद दाते की बदौलत जिन्होंने दिसंबर 2017 को पुलिस मुख्यालय से इस बारे में पत्र लिखा जिसके बाद अब बजट स्वीकृत हुआ है   अगर

दाते पूरे मामले को गंभीरता से न  लेते  तो 14 साल की तरह समय आगे और लग  सकता था   । बहराल  अब  दाते c.b.i  का अहम हिस्सा होंगे  और उनको उनकी ईमानदारी के लिए इनकी निष्ठा के लिए उतराखंड की जनंता सदैव याद रखेगी खास कर वो 20  हज़ार की आबादी जो अब  राहत की नींद सो सकती है जिनके मन के डर को खत्म किया जा रहा   है मिसाइल को नष्ट कर ।

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