है भोले नाथ , शिव की ससुराल , धर्मंनगरी हरिद्वार ,है माँ गंगा ये कैसा इंसाफ तेरे वास्ते तेरी निर्मल धारा के वास्ते तेरा बेटा गंगा पुत्र स्वामी सानंद मौत की नींद सो गए , उन्होंने बलिदान दे दिया गंगा मैया , पर तेरा बेटा गंगा पुत्र तेरी गोद मे नही समा सकता पर आज उनका पार्थिव शरीर क्या एक डुबकी भी नही लगा सकता है तेरी लहरों में। मा गंगा के लिए लड़ने बलिदान देने वाले को ही एक अब गंगा जल तक नसीब नही । है भगवान देख तेरी नगरी में ये क्या क्या हो रहा है।
सारे संतों की मांग है कि स्वामी सानंद के शरीर को गंगा स्नान की मिले अनुमति 

आपको बता दे कि स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को गंगा जल नसीब कराने के लिए एम्स में संतों का जमावड़ा शनिवार को भी रहा।
मातृ सदन के संतों सहित जयराम आश्रम के संचालक ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी ने एम्स प्रशासन से मुलाकात कर अनुरोध किया कि पार्थिव शरीर को गंगा स्नान कराने की अनुमति दी जाए। इस प्रस्ताव पर संस्थान प्रबंधन ने अभी तक हामी नहीं भरी है।


इस मुलाकात के बाद बाहर आए ब्रह्मस्वरूप ने बताया कि हमारी मुलाकात चिकित्साधीक्षक बृजेंद्र कुमार से हुई। उनसे कहा कि सनातन परंपरा के अनुसार सन्यास ग्रहण के बाद पहला अधिकार गुरु का होता है। इसके साथ ही भारतीय परंपरानुसार स्वामी सानंद के पार्थिव शरीर को गंगा स्नान और मुंह में गंगा जल डालने की अनुमति मिलनी चाहिए।


एम्स जो भी मेडिकल प्रक्रिया अपनाना चाहे उस पर कोई एतराज नहीं है। यह बेहद अफसोस जनक है कि गंगा के लिए जीने और मरने वाले संत को अंतिम बेला में गंगा जल न नसीब हो।
बताओ क्या हो रहा है ये स्वामी सानंद ने जब अपना देह दान देने का फैसला लिया था अगर उनको मालूम होता कि एक दिन वो समय भी आएगा कि जिस गंगा के लिए वो समाज के उन भेड़ियों से लड़े जिनके कारण उनको अनशन करना पड़ा । ओर अंतिम समय मे उन्हें उसी गंगा का जल नसीब ना हो । तो स्याद देह दान का सकल्प ना लेते ।
बहराल आगे देखते है क्या ओर कुछ निकलकर आता है

ओर क्या सरकार यहा पर बीच में आती भी है या नही । ये भी देखना होगा

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