जो भी गंगा की बात करेगा उसकी हत्या कर दी जायेगी , ओर बीजेपी सरकार पर दो संतों की मौत का दाग! माँ गंगा के तीन पुत्रों का बलिदान ! पूरी ख़बर किसने क्या कहा

 

आपको बता दे कि स्वामी सानंद ही नहीं ये दो संत भी गंगा के लिए त्याग चुके अपने प्राण, नहीं उठ सका मौत के राज से पर्दा
आपको बता दे कि  स्वामी सानंद से पहले गंगा रक्षा के लिए प्राण त्यागने वाले स्वामी निगमानंद थे
वर्ष 1998 में कनखल थाना क्षेत्र के जगजीतपुर गांव में गंगा के किनारे स्थापित की गई मातृसदन संस्था गंगा के लिए बलिदान करने वालों की भूमि बन गई है। वैसे तो स्वामी सानंद से पूर्व इस संस्था के दो ब्रह्मचारी अपना बलिदान दे चुके हैं।  
इनमें से निगमानंद का बलिदान तो विशुद्ध रूप से गंगा के लिए ही था। मातृसदन के अनुयायी आगे भी गंगा पर बलिदान होने के लिए खुद को तत्पर बता रहे हैं।

मातृसदन संस्था के संतों ने जब ध्वनि प्रदूषण और गंगा में अवैध खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर संघर्ष शुरू किया तो पहले स्थानीय निवासियों के और उसके बाद खनन माफिया के निशाने पर आ गए थे।
कईं बार इन संतों पर हमले भी किए गए, लेकिन उन्होंने गंगा की रक्षा के लिए अपना संघर्ष नहीं त्यागी। वर्ष 2003 में आश्रम में स्वामी गोकुलानंद नैनीताल जनपद के एक गांव के पास जंगल में मृत अवस्था में पड़े मिले थे। इसके बाद करीब 78 दिनों तक गंगा में खनन पर रोक लगाने की मांग को लेकर अनशन करते हुए ब्रह्मचारी निगमानंद सरस्वती का 13 जून 2011 में देहरादून स्थित जौलीग्रांट अस्पताल में देहावसान हो गया था।
इस बीच स्वामी सानंद ने भी 112 दिन तक अनशन करते हुए खुद को गंगा के प्रति समर्पित कर दिया। उन्होंने अपने संघर्ष के लिए मातृसदन का ही परिसर चुना और यहां के संघर्ष और बलिदान की परंपरा को आगे बढ़ाया। मातृसदन के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती का कहना है कि मातृसदन गंगा के लिए कोई भी बलिदान देने को तत्पर है। 
आपको बता दे कि गंगा रक्षा की खातिर बलिदान दे चुके मातृसदन के युवा संत निगमानंद की मौत का मामला सात साल बाद भी नहीं खुल पाया है।। सीबीआई केस में एक बार क्लोजर रिपोर्ट भी लगा चुकी है। हालांकि कोर्ट के फिर से सीबीआई जांच कराने के आदेश राज्य सरकार को दिए हैं, लेकिन राज्य सरकार इस आदेशों पर कुंडली मारे बैठी है।

वर्ष 2011 में गंगा रक्षा के लिए आंदोलनरत मातृसदन के युवा संत की जौलीग्रांट अस्पताल में मौत हुई थी। संस्था के परमाध्यक्ष शिवानंद सरस्वती ने जिला अस्पताल एवं जौलीग्रांट अस्पताल के चिकित्सकों पर जहर देकर निगमानंद की हत्या कर देने का आरोप जड़ा था। तब मातृसदन के परमाध्यक्ष की तरफ से निगमानंद की हत्या का केस भी दर्ज हुआ था।

सीबीआई भी कई बार जांच के लिए हरिद्वार पहुंची और तथ्य जुटाए। हालांकि माह बाद ही सीबीआई ने संत निगमानंद की मौत के मामले में क्लोजर रिपोर्ट लगा दी थी। क्लोजर रिपोर्ट के बाद संस्था के परमाध्यक्ष ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। तब कोर्ट ने सीबीआई को फिर से निगमानंद के केस की जांच के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक भी सीबीआई ने केस को हाथ में नहीं लिया 
वही स्वामी सानंद की मौत के बाद उनके गुरू अविमुक्तेश्वरानंद ने राज्य और केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किये हैं. उन्होंने स्वामी सनानंद की हत्या की आशंका जताते हुए उनके शव का पोस्टमार्टम कराने के साथ ही उच्च स्तरीय सीबीआई जांच की मांग की है. इसके अलावा उन्होंने स्वामी सानंद की अंतिम इच्छा के अनुसार उनकी देह को काशी हिंदू विश्वविद्यालय को सौंपने का आग्रह किया है.
स्वामी सानंद के गुरु अविमुक्तेश्वरानंद का कहना है कि सरकार संतों को यह संदेश देना चाहती है कि जो भी गंगा की बात करेगा उसकी हत्या कर दी जाएगी. उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि स्वामी सानंद के ध्येय को आगे बढ़ाते हुए संत समाज गंगा की अविरलता और स्वच्छता के लिए आंदोलन जारी रखेगा. उन्होंने गंगा प्रेमियों से एकजुट होने का आह्वान किया है.
सरकार पर आरोप लगाते हुए अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि यह कैसे हो सकता है कि जो व्यक्ति सुबह तक स्वस्थ अवस्था में रहे और अपने हाथ से ही प्रेस विज्ञप्ति लिखकर जारी करे. फिर अचानक अस्पताल में एक रात बिताते ही उनकी मृत्यु हो जाए. उन्होंने स्वामी सानंद की हत्या की आशंका जताते हुए इस मामले की उच्च स्तरीय सीबीआई जांच की मांग की है. 
वही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पर्यावरणविद प्रो. जीडी अग्रवाल उर्फ स्वामी सानंद के निधन पर गहरा दु:ख व्यक्त किया है. स्वामी सानंद के निधन की खबर आने के बाद सीएम त्रिवेंद्र ने अपनी सभी दौरे रद्द कर दिए. वहीं इस मामले को लेकर सीएम आवास पर मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों के साथ बैठक भी की.हालांकि इस बैठक में क्या निर्णय हुआ है. इसको लेकर कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है. स्वामी सानंद के निधन के बाद प्रशासन, शासन और सरकार में हड़कंप मचा हुआ है. सीएम ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर दिए है. सीएम को पौड़ी और सतपुली में एक कार्यक्रम में शामिल होने जाना था.

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