सीएम त्रिवेन्द्र एक राजनीतिक विरोधी उनके अनेक! ओर चुनोतिया जो कहा वो कर दिखाने की!

आपको बता दे कि अडानी और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह के बीच हुई बात का वीडियो जब से वायरल हुआ है तब से ही उत्तराखंड की सियासत में भूचाल सा मचा हुवा है।


सवाल उठने लगे है कि उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट में क्या केंद्र सरकार के दबाव में निवेशक कार्यक्रम में शामिल होने देहारदून आए थे? क्या सरकार कुछ छुपाने की कोशिश कर रही है? क्या उत्तराखंड सरकार से नाराज हो गए हैं गौतम अडानी ? क्या ये प्रोग्राम सिर्फ जुमला था? आखिर क्यों किये गए निवेशकों के समिट के नाम पर करोड़ो खर्च? क्या निवेशक निवेश करेगे भी ? कुछ ऐसे सवाल हैं मीडिया कर्मी के मन से लेकर सोशल मीडिया में खूब वायरल हो रहे ओर ये सब सर्फ एक वीडियो के कारण जिसने उत्तराखंड की सियासत को गर्माहट दे रखी है।
आपको बता दे कि दरअसल, उत्तराखंड इन्वेस्टर्स समिट से पहले 26 सितंबर को उद्योगपति गौतम अडानी देहरादून आए थे. जहां सीएम आवास पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अडानी का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया था. ओर उत्तराखंड सरकार और गौतम अडानी के बीच निवेश को लेकर एक एमओयू भी साइन हुआ था, जिसका एक वो वीडियो भी सामने आया है.

जिस वीडियो में गौतम अडानी राज्य सरकार की व्यवस्थाओं को पोल खोल रहे हैं. उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट से सीएम आवास तक आने में उन्हें किस तरह जाम से दो चार होना पड़ा. इसके साथ उस ही वीडियो में ये भी कहते हुए दिखाई दे रहे हैं कि इन्वेस्टर्स समिट से होता कुछ नहीं है. वो सिर्फ सरकार के कहने पर यहां आ रहे हैं. हालांकि ये वीडियो किसने बनाया है और कहां से शेयर किया ये किसी को नहीं पता कई लोग तो इस वीडियो को लेकर सवाल खड़े कर रहे हैं. लेकिन इस वीडियो ने उत्तराखंड की सियासत में वो बवाल मचा दिया है जिससे विपक्ष को भी खूब मौका मिला है सरकार पर हमला बोलने का 

आपको बता दे कि उत्तराखंड सरकार जिस इन्वेस्टर्स समिट को अपनी उपलब्धि बता रही है , तो वही इस वीडियो ने त्रिवेन्द्र सरकार की तीन महीने की सारी मेहनत पर पानी फेर दिया है. ख़बर यही है कि 26 सितंबर को अडानी अहमदाबाद से अपने स्पेशल विमान से देहरादून पहुंचे थे. अडानी ने मीडिया के सामने सरकार के साथ एमओयू भी साइन किया था.
ओर उसी बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और उनका पूरा अमला इस बात से खुश था कि अडानी जैसे उद्योगपति राज्य में बड़ा निवेश कर रहे हैं. लिहाजा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र  ने उद्योगपति को भी अपने पूरे शासकीय अमले से भी मिलवाया था, लेकिन उसी बीच वहां चल रहे कैमरे में कुछ ऐसा कैद हो गया, जिसकी खबर शायद किसी को नहीं लगी।
उस बैठक के दौरान अडानी ने मुख्यमंत्री और तमाम अधिकारियों को बताया कि उन्हें एयरपोर्ट से सीएम आवास तक आने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा. अडानी यहीं नहीं रुके और उन्होंने मुख्यमंत्री से यह तक कह दिया कि इस तरह के इन्वेस्टर्स समिट से कुछ नहीं होता है. लिहाजा सारे इन्वेस्टर्स जानते है कि वो यहां क्यों आ रहे हैं?
अडानी ने यहां तक कह दिया कि वो काम करने के लिए नहीं बल्कि केंद्र सरकार के कहने पर आ रहे हैं. क्योंकि उन्हें भी धंधा करना होता है. बस फिर क्या था इस वीडियो के वायरल होने पर त्रिवेन्द्र सरकार की खूब फजीहत हो रही है. तो कांग्रेस को भी सरकार पर हमला करने का मौका मिल गया है.
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत से लेकर किशोर उपाध्याय ओर कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कांग्रेस पार्टी के तमाम  प्रवक्ताओं ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. कांग्रेस का कहना है कि त्रिवेंद्र सरकार की गिरती छवि को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने इन्वेस्टर्स समिट का एक जुमला छोड़ा था और यह जुमला ही रहेगा.
वही कांग्रेस इस वीडियो को अपने सोशल साइट पर लगातार शेयर कर रही है. कांग्रेस का मानना है कि जब इन्वेस्टर्स की यह राय है तो फिर कैसे राज्य में इन्वेस्ट आएगा. फिलहाल जो कांग्रेस उत्तराखंड में निष्क्रिय पड़ी हुई थी, उसे अडानी का यह वीडियो हाथ लगने के बाद सरकार को घेरने का मौका जरूर मिल गया है।
लेकिन इन सब के बीच कई सवाल भी खड़े हो गये है। कि आखिर क्या झूठ है और क्या फसाना। खेर आने वाले समय मे सबकुछ निकलकर जनता के सामने आना तय है । कि निवेशकों का निवेश कितना राज्य मे होने वाला है।लेकिन एक बात तो साफ है कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के राजनीतिक विरोधियों की नज़र हर पल हर समय मुख्यमंत्री के ऊपर टिकी है कि कही भी कोई चूक हो तो तुरंत उसको वायरल कर त्रिवेन्द्र रावत को हाईकमान के आगे दुसरे नज़रिए से लाया जाए। हो सकता है की मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत के सुभचिन्तक जो लोग बने है उनमे से ही कोई उनका राजनीतिक विरोधी छुपा हो या उन्हें कोई इस्तमाल कर रहा हो। ये तो सच जो भी हो मुखिया खुद ही जाने । पर जिस तरह से अडानी की वीडियो किल्प वारयल हुई है उसने विपक्ष को हमला बोलने का मौका दे दिया और हो ये भी सकता है कि सीएम त्रिवेन्द्र को इस वजह से बीजेपी हाईकामान की फटकार भी लगे ।
अब इस राजनीतिक नफा नुकसान का आकलन तो राजनीतिक पार्टियां के नेता बंद कमरे मे गुणा भाग करने मे जुट भी गए है पर
एक बात है जो इन सब से अलग है वो ये बात है कि इस अडानी वीडियो कील्प के निकलने के बाद अब राज्य का भला होना तय है मतलब ये की अब हर हाल में अडानी ओर अन्य निवेशकों को राज्य मे निवेश करना होगा ।क्योकि इस अडानी वीडियो किल्प के बाद राज्य और केंद्र सरकार को ये बताना होगा कि हकीकत में ये जुमला नही था और ये देखो निवेशक ने निवेश कर दिया । जिसमे अब परीक्षा त्रिवेन्द्र रावत सरकार की नही बल्कि बीजेपी हाईकमान ओर केंद्र सरकार की होगी। बोलता उतराखंड को लगता है कि अब तक ना निवेश करने वाले लोग भी अब इस अडानी वीडियो किल्प के बाद कुछ ना कुछ निवेश जरूर करेगे ।क्योकि अब उनकी साख का सवाल भी है । बहराल दो बाते है एक तो सीएम त्रिवेन्द्र रावत को ये सोच लेना चईये की उनको सीएम की कुर्सी मे बैठा देख कांग्रेस उतनी दुखी नही जितने उनके कुनबे के लोग है । जो 24 घण्टे उनके ही आगे पीछे या पर्दे के पीछे है। या फिर किसी का मोहरा। इसलिए सावधान सीएम त्रिवेन्द्र जी । दूसरी बात ये है कि बड़े जोरो से ये शोर है कि त्रिवेन्द्र पहाड़ को बेच देगे । बहार के लोगो के हाथों गाँव गाँव बिक जायगे। ओर पहाड़ी बनेगा बनेगा अपनी ही जमीन पर नोकर। इस तस्वीर को भी त्रिवेन्द्र सरकार को साफ करनी होगी। ।
बहराल बोलता उत्तराखंड तो राज्य हित की बात करता है और वो यही है कि निवेशक राज्य मे निवेश करे अब उन पर दबाव केंद्र सरकार का पड़ेगा या नही ये वो जाने हमे तो विकास से मतलब है क्योकि डबल इज़न की सरकार जनता ने दी है वो भी भी प्रचंड बहुमत से और दूसरी बात सावधान राज्य के नोकरशाह भूल कर भी वो नीतियां मत बनाना जिससे पहाड़ के लोगो के हक हकूक पर चोट पहुँचे ।इसका पूरा ख्याल रखना वरना आप सब तो जानते ही है कि अब युवा है उत्तराखंड वो भी 18 साल वाला युवा । ओर युवा प्रदेश के युवा शक़्ति अब धोखा ओर छलावा बर्दाश्त नही करेगी ।इस बात को पहाड़ विरोधी अफसर भी सुन ले।

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