4366 लोगों की रोटी पर संकट …!

राज्य के सरकारी स्कूलों में मास्टर साहबों की कमी समझो शुरू हो गयी है और ये कमी दस बीस… पचास… सौ …. मास्टरों की नहीं बल्कि पूरे पांच हजार मास्टरों की है जी हां शिक्षा विभाग संकट में पड़ गया है हम आपको इसकी वजह भी बता देते हैं और वो वजह ये है कि अब अतिथि टीचर जो राज्य के सरकारी स्कूलों में तैनात थे जिनकी संख्या लगभग 4366 है इनकी सेवाएं 31 मार्च को समाप्त हो गई हैं

क्योंकि साल 2017 में हाईकोर्ट ने अतिथि शिक्षा व्यवस्था को 31 मार्च तक ही बहाल रखने की रियायत दी थी अब ऐसे में जहां एक तरफ शिक्षकों की कमी का टोटा शुरू हो गया है।तो वहीं चार हजार लोग भी अभी समझो बेरोजगार हैं और ये टीचर जहां सबसे ज्यादा सेवाएं दे रहे थे। वो जगहें पर्वतीय क्षेत्र हैं बहरहाल आज डबल इंजन की सरकार शिक्षकों कमी से निपटने के लिए अब हाईकोर्ट के फैसले पर नजर लगायी हुई है क्योंकि शिक्षा विभाग में शिक्षकों की कमी का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने मोडीफिकेशन अप्लीकेशन दाखिल की है। इसमें कहा गया है कि 31 मार्च 2019 तक अतिथि शिक्षा व्यवस्था को कायम रखने की छूट मांगी गई है। उम्मीद की जा रही है कि 10 अप्रैल से पहले इस पर सुनवाई हो जाएगी। आपको बता दें की अब नयें सत्र की शुरूआत हो गयी है और पहले दिन ही लगभग 5 हजार शिक्षकों की कमी को लेकर शिक्षा विभाग संकट में आ गया। बहरहाल कुल मिलाकर जहां एक तरफ शिक्षा विभाग में संकट के बादल छाये हुए हैं वहीं 4366 लोगों की रोजी रोटी का सवाल भी खड़ा हो गया है।

अब देखना ये होगा कि हाईकोर्ट क्या निर्णय लेता है यदि अतिथि शिक्षकों की ये व्यवस्था 31 मार्च 2019 तक के लिए बढाई जाती है तो युवाओं के लिए एक साल के लिए रोजगार फिर उपलब्ध हो जाएगा और सरकार के साथ साथ शिक्षा विभाग को भी राहत मिलेगी मगर यदि अतिथि शिक्षकों वाली ये व्यवस्था आगे नहीं बढ़ाई जाती तो सरकार पर दबाव होगा शिक्षा विभाग के हालात सुधारने का और ये अतिथि शिक्षक एक बार फिर सड़कों पर आंदोलन करते हुए देखे जाएंगे। बहरहाल माननीय हाईकोर्ट फैसला जो भी लेगा वो सबको मान्य होगा पर सरकार को सोचना होगा कि राज्य में अब न अस्थाई राजधानी की जरूरत है और  न अस्थाई नौकरियों की क्योंकि 18वें साल को पूरा कर नवंबर में ये राज्य 19वें साल में प्रवेश कर जाएगा और तब आंदोलन के गर्भ से जन्में राज्य के युवक युवतियां जो भी मांगेंगे वो सब स्थाई ही होगा।

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