40 साल से सड़क का इंतज़ार जंगली जानवरों के बीच फंसा ये गाँव

मेरा ओर आपके ओर हमारे उत्तराखंण्ड के पहाड़ी जिले आज भी बुनयादी सुविधाओं के लिए तरस रहे है आपको वहा की ख़बर बता रहा हूँ जहा 40 साल से लोग सड़क से महरूम हैं आलम ये है कि इस गांव के लोग इतने दुखी है कि प्रस्ताव पास होने के बाद भी अभी तक नहीं बन पाई पहाड़ की लाइफ लाइन मानी जाने वाली ये सड़क
आपको बता दे कि हल्द्वानी जिला मुख्यालय से महज 13 किलोमीटर दूर हल्दूचौड़ के गंगापुर गांव के लोग आज भी सड़क से महरूम हैं. यहां के लोग पिछले चालीस-पैतालीस सालों से लगातार रोड बनवाने को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं. पर कोई इनकी आप बीती को सुनने को तैयार नही यही नही ग्रामीणों के अनुसार साल 2005 में उनके गांव के लिए सड़क मंजूर हो गई थी. जिसके लिए वन विभाग ने छपान भी किया था, लेकिन तब से लेकर सरकारे बदली , मुख्यमंत्री बदले पर ये सड़क ना बन पाई । 
आपको बता दे कि गंगापुर गांव के ग्रामीणों का कहना है कि गांव की सड़क का प्रस्ताव पूर्व विधायक और मंत्री हरीश चंद्र दुर्गापाल के समय में ही पास हो गया था. उन्होंने कहा कि नई सरकार के आते ही सड़क निर्माण के लिए कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है.
इस पूरे मामले पर बोलते हुए लालकुआं विधायक नवीन चंद्र दुम्का का कहना है कि गंगापुर गांव के लिए प्रस्तावित सड़क आज भी वन भूमि में है. जिसके लिए अभी भी भूमि वन मंत्रालय से हस्तांतरित नहीं की गई है. जिसके हस्तांतरण होने की झूठी अफवाह फैलाई जा रही है. उनका कहना है कि इसके लिए उन्होंने वन मंत्रालय को प्रस्ताव भी भेजा है. मंजूरी मिलने के बाद गंगापुर गांव में वे सड़क निर्माण का कार्य वे स्वयं करवाएंगे.
विधायक की बात सुनकर पहाड़ के लोग बोल रहे है कि फ़िर किस बात का डबल इज़न जब काम अभी भी नही हो रहे है ।किस बात का डबल इज़न जब अभी तक वन विभाग के तहत आने वाले मामले लभी तक लटके पडे है।पाहड़ के लोगो के सवाल अपनी जगह सही है क्योंकि चुनाव मे उनको यही कहा गया था कि बस एक बार बीजेपी की सरकार आप यहा भी बना दीजिए फिर देखिए डबल इज़न के राज मे आपके काम रफ्तार से होगे ।
आपको बता दे कि दूसरी ओर जंगल से सटे गांवों में रह रहे ग्रामीणों का कहना है कि सड़क नहीं होने से उन्हें हाथी, बाघ सहित अन्य जंगली जानवरों से जान का खतरा बना रहता है. इन लोगों का कहना है कि वे कई सालों से सड़क निर्माण  के लिए प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन आजतक मामला अटका पड़ा है बहराल मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत पहाड़ के दर्द को जानते है और समझते भी है और उनके पास ऐसे कही मामले ओर भी आये होंगे लिहाज़ा इन सब बातो की देखरेख ओर ऐसे कितने गाँव राज्य मे है जहाँ वन भूमि हस्तांतरण के मामले लटके पडे है जिसकी वजह से उनके पहाड़ के गाँव मे सड़क नही पहुच पा रही है इन सब पर विशेष रूप से किसी अधिकारी को ये सब काम पर लगाना चाइए ताकि जल्द पूरी रिपोर्ट बनने के बाद प्रस्ताव आगे दिया जाए

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