त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित करने के बाद एक मास्टर स्ट्रोक ओर खेल दिया बृहस्पतिवार को प्रदेश सरकार ने विपक्ष के एक और मुद्दे को धराशायी कर दिया। अब सरकार इसी सत्र और भराड़ीसैंण में 26 मार्च को बजट पास करवाएगी।
बता दे कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में सात मार्च तक सदन को जारी रखने का फैसला लिया गया, लेकिन इस दौरान बजट पर सामान्य चर्चा सात मार्च को ही होगी। बजट पास कराने के लिए इसी सत्र में सदन 25 से 27 मार्च तक भराड़ीसैंण में ही चलेगा। 25 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होगी। विपक्ष के कटौती प्रस्ताव इसी दिन स्वीकार किए जाएंगे। 26 मार्च को विभागों के बजट पर चर्चा होने के बाद उन्हें स्वीकृत किया जाएगा।
ओर इसी दिन सरकार पूरे बजट को प्रस्तुत कर चर्चा के बाद उसे पास कराएगी।
इससे पहले कार्यमंत्रणा समिति ने सात मार्च तक बजट पारित करने का फैसला किया था। इस पर विपक्ष ने खासा हो हल्ला मचाया था और बजट सत्र बढ़ाने की मांग की थी। इसके बाद इस पर भी विचार हुआ कि होली के बाद दो दिन का सत्र देहरादून में आयोजित कर लिया जाए। लेकिन इसमें तकनीकी अड़चन थी।  बता दे कि
सरकार बजट पास कराए बिना सत्र को समाप्त नहीं कर सकती थी। देहरादून में बजट पास कराने का मतलब होता कि सरकार को भराड़ीसैंण का सत्र समाप्त करना पड़ता और देहरादून में अलग से सत्र आयोजित करना पड़ता। कार्य संचालन नियमावली में स्थान और समय दोनों को लेकर सत्र की घोषणा की व्यवस्था है।

वही कल मौसम की आंखमिचौली के बीच सरकार पर ग्रीष्मकालीन राजधानी का जश्न हावी रहा। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के साथ विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल समेत भाजपा विधायकों ने जमकर गुलाल खेला। ढोल व दमाऊ पर नाचे गाए। पर राज्य के अधिकतर मंत्री इस जश्न मैं दिखाई नही दिए
या कह सकते है कि केमरे के फ्रेम मे नही आये। या कैमरा उनको तलाश नही पाया खेर..Is बीच

गैरसैंण के आसपास की महिलाओं ने झोड़ा चांचरी नृत्य से अपनी खुशी का इजहार किया। तो विधायकों ने स्थानीय लोगों के साथ ढोल की थाप पर पांव थिरकाए।
ओर इन सब से दूर रहे विपक्ष ने सदन में प्रश्न काल नहीं चलने दिया और सरकार को नियमों व परंपराओं में बांधे रखने की कोशिश की।
बता दे कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने बुधवार देर शाम ग्रीष्मकालीन राजधानी की घोषणा की, जिसका असर बृहस्पतिवार सुबह नजर आया। आंदोलनकारियों की गैर मौजूदगी में जगह-जगह चेकिंग से भी लोगों को रियायत मिली। भराड़ीसैंण के विधानमंडल भवन के सामने ढोल दमाऊ की थाप के बीच जश्न का माहौल बन गया। गैरसैंण के आसपास गांव गवाड़ तल्ला, सिलंगी, सिमटी समेत अन्य गांवों से आई महिलाएं जश्न में शामिल हुई।
जैसे ही  मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत यहां पहुंचे तो जोश और उत्साह बढ़ गया। महिलाओं ने मुख्यमंत्री व भाजपा विधायकों का स्वागत किया। विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल, प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत का भी इसी तरह स्वागत हुआ। उत्साह का आलम ये रहा कि नेता फूल मालाओं से लदे सदन में पहुंच गए।
ओर इसके उलट विपक्ष खामोश, जश्न से दूर रहते हुए बैकफुट पर दिखाई दिया। प्रश्न काल की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस के सात विधायक जिला विकास प्राधिकरण पर चर्चा की मांग को लेकर वेल में आ धमके। विपक्ष इसी मुद्दे पर कार्य स्थगन प्रस्ताव भी लेकर आया। नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश लगातार पीठ से फैसला करने की मांग करती रही। पीठ पर विधानसभा उपाध्यक्ष रघुनाथ सिंह चौहान मौजूद थे। उन्होंने नियम 58 के तहत इस मांग चर्चा करना स्वीकार किया।
तो वही इस पर संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने वैधानिकता का सवाल उठाया। पूरा प्रश्न काल इसी की भेंट चढ़ गया। मदन कौशिक ने कहा कि जिला विकास प्राधिकरण पर विधानसभा समिति की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जा चुकी है। इस रिपोर्ट को खारिज किए बिना चर्चा संभव नहीं है। विपक्ष का कहना था कि पीठ चर्चा की मांग को नियम 58 में स्वीकार कर चुकी है। इस पर सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित हो गई। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल ने नियम 58 के तहत इस मामले पर चर्चा की अनुमति दी।
वही अब मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत फूलों की माला पहने सदन में पहुंचे तो हंगामा हो गया। कांग्रेेस विधायक प्रीतम सिंह ने इसे सदन का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि सदन में सदस्य बैच तक नहीं लगा सकते और नेता सदन फूलों की माला से लदे हुए चले आए।

विधायक देशराज कर्णवाल ने भी फूलों की एक माला पहनी हुई थी। संसदीय कार्यमंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सदन में मेज थपथपाना और हंगामा करना भी सदन की परंपरा में नहीं है। लेकिन विपक्ष इन नियमों और परंपराओं को ध्वस्त करता रहा है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। जिससे वह यह मामला उठा रहा है।

वही जब सत्र शुरू होने के कुछ देर बाद नेता सदन त्रिवेंद्र सिंह रावत सदन में पहुंचे तो सत्ता पक्ष के विधायकों ने मेजें थपथपा कर उनका सम्मान किया। सामान्य रूप से नेता सदन के पहुंचने को सत्ता पक्ष के विधायक खामोशी से स्वीकार करते रहे हैं। मुख्यमंत्री भी कुछ समय तक ही सदन में रहे।

10 विधेयक हुए पारित

-सोबन सिंह जीना विश्वविद्यालय 2019
-उत्तराखंड संयुक्त प्रांत आबकारी संशोधन विधेयक, 2020
-ग्राफिक एरा पर्वतीय विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक
-यूनिर्वसिटी ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेकभनोलाजी रुडकी, विधेयक 2020
-उत्तराखंड उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020
– उत्तराखंड उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020
-उत्तराखंड साक्षी संरक्षण विधेयक, 2020
-उत्तराखंड पंचायतीराज संशोधन विधेयक, 2020
-उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद अधिनियम 1959 संशोधन विधेयक 2020
-उत्तराखंड उपकर संशोधन विधेयक 2020।


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