पुराना रेल इंजन और प्लेन बढ़ाएगा योगनगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की शान

पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने किया ऋषिकेश रेलवे स्टेशन और शिवपुरी स्थित टनल का निरीक्षण

देहरादून

उत्तराखंड के पर्यटन धर्मस्व, संस्कृति एवं सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज द्वारा पूर्व में ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के लिए किए गए प्रयास आज धरातल पर साकार होते हुए प्रत्यक्ष रूप दिखाई देने लगे हैं। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे का मुख्य स्टेशन योग नगरी ऋषिकेश में बनकर तैयार हो चुका है। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने आज ऋषिकेश योग नगरी में रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने के साथ-साथ अधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए।


सतपाल महाराज ने रेलवे स्टेशन के निरीक्षण के दौरान बताया बताया कि बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन का मुख्य स्टेशन पूरी तरह बनकर तैयार है। पर्यटन की दृष्टि से इसको और अधिक विकसित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रेल का पुराना इंजन और प्लेन योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की शान बढ़ाएगा। दोनों को यहां धरोहर के रूप में रखा जाएगा। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने
योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन की व्यवस्थाओं का जायजा लेते हुए रेलवे विकास निगम के परियोजना निदेशक हिमांशु बडोनी से स्टेशन के सभी तकनीकी पहलुओं पर भी चर्चा की। कैबिनेट मंत्री ने स्टेशन में पार्क, प्लेटफार्म, पटरियों का निरीक्षण करने के बाद स्टेशन मास्टर के कक्ष का भी निरीक्षण किया।

इस दौरान उन्होंने आला अधिकारियों को स्टेशन में एक रेल का पुराना इंजन और पुराना प्लेन धरोहर के रूप में रखने के लिए कहा। उन्होने कहा कि 22 हजार 42 करोड़ की लागत से बनने वाली ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन जिसमें 12 स्टेशन और 17 टनल हैं इससे चार धाम को भी जोड़ा जा रहा है। इससे उत्तराखंड में पर्यटन को काफी बढ़ावा मिलेगा। उन्होने कहा कि रेलवे स्टेशन पर मानव उत्थान सेवा समिति की ओर से दो प्याऊ भी लगाये जायेंगे। रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने के बाद पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज ने शिवपुरी स्थित रेलवे टनल के अन्दर जाकर उसका निरीक्षण भी किया। उन्होंने बताया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन के तहत जो 17 टनल बनाई जा रही हैं उनमें आधुनिक मशीनों का प्रयोग हो रहा है। इससे पूर्व पूरे देश में कहीं भी इस तकनीक का अभी तक प्रयोग नहीं हुआ है। सतपाल महाराज ने कहा कि ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेलवे लाइन में बनने वाली सुरंगों मैं काम कर रहे इंजीनियरों को काफी अनुभव प्राप्त होगा और सुरंग के मामले में हम आत्मनिर्भर हो सकेंगे। सतपाल महाराज ने कहा कि रेल और सड़क मार्ग दोनों ही अपने गंतव्य तक पहुंचाती हैं इसलिए भविष्य में हमारा प्रयास होगा कि रेल और सड़क मार्ग बनने से पहले प्रारंभिक अवस्था में इसकी एक संयुक्त डीपीआर बनाकर रेल और सड़क दोनों का कार्य एक ही एजेन्सी करे ताकि टनल के अंदर रेल और मोटर गाड़ियां दोनों का आवागमन सुनिश्चित हो सके। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बताया की अलास्का में अधिकांश रेल लाइनों के समीप वाहन चलते हैं। वाहनों के पटरी पार करने के दौरान पहले रेल के आवागमन को सुनिश्चित किया जाता है। इसके बाद ही वाहन आगे बढ़ते हैं। बताया कि इस योजना को मूर्त रूप देने पर विचार किया जा रहा है।
योग नगरी ऋषिकेश रेलवे स्टेशन से चंडीगढ़ के लिए रेल कनेक्टिविटी जोड़ी जाएगी। कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज ने बताया कि रेल कनेक्टिविटी पोंटा साहिब से होते हुए चंडीगढ़ के लिए जुड़ेगी। जिसके बाद ट्रेन से ऋषिकेश-चंडीगढ़ का सफर भी किया जा सकेगा। इस मौके पर आरबीएनएल के अधिकारी आरसी वर्मा, एसके गुप्ता, राम सिंह, वरिष्ठ समाजसेवी बचन पोखरियाल, रोटरी सेंट्रल ऋषिकेश अध्यक्ष हितेंद्र पवार, होटल व्यवसाई अक्षत गोयल, राकेश नौटियाल, विजेंद्र पंवार, विजेंद्र बिष्ट, सावन कुमार, मनजीत रौतेला, मोहन सकलानी, गिरीश नौटियाल, धर्म सिंह, लक्ष्मण नेगी, गंगा रांगड आदि उपस्थित थे।

वैसे आपको सच बताये तो
एक समय में या कह ले कभी सतपाल महाराज पर खूब हंसते थे लोग ओर नेता ,
बोलता उत्तराखंड ना सतपाल महाराज का ना भक्त है
ओर ना कोई सियासी बात बोल रहा है न महाराज की कोई चारणगिरी हो रही है ना बात कुछ और है पर जो है वो सच है
आज हर कोई ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेलवे लाइन के ऋषिकेश में नवनिर्मित पहले स्टेशन के चित्र साझा करने में सीना जैसे तैसे खिंच कर पूरा 60 इंच कर रहे हैं। खैर आज के दौर में उनके लिए जरुरी भी है।
लेकिन सियासत से दूर एक बात अकाट्य सत्य है कि पिछली सदी के आखिरी दशक में तत्कालीन देवगौड़ा सरकार के मंत्री व तिवारी कांग्रेस के नेता सतपाल महाराज की एक रट ही थी, जो आज यह सब सम्भव होता नजर आ रहा है।
बता दे कि उस दौर में महाराज के आज़ के हमदल (भाजपा) के नेता उनकी इस परिकल्पना पर हंसते न थकते थे,
पर ये भी सच है कि
बेशक मोदी के नेतृत्व वाली NDA सरकार के दृढ़ संकल्प से यह सम्भव हो रहा हो लेकिन असल मेँ सतपाल महाराज ने जो कल्पना 25 बरस पहले की थी, यह मूर्त रूप उसी कल्पना की परिणति है। उत्तराखण्ड की आज की सियासत और सरकार के किसी एक नेता को इस महत्वपूर्ण परियोजना का रत्ती भर भी श्रेय नहीं दिया जा सकता, सिवाय महाराज के ये कड़वा सत्य है ।
बाकी उससे बड़ा कड़वा सत्य ये है कि मोदी है तभी ये मुमकीन भी हो रहा है ।
कह सकते है कि सतपाल महाराज के 25 साल पहले देखे सपने को आज मोदी की सरकार पूरी करती दिखाई दे रही है..स्वयं मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सहित पूरी कैबिनट का सपना है कि इस प्रोजेक्ट को जल्द पूरा किया जाए और  साल 2024 तक हम सब  रेल मे ही बैठकर कर्णप्रयाग तक जायेगे 


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