20किलोमीटर का पैदल दुर्गम रास्ता 8 गाँव ओर 1500 लोग बेहाल इनकी फरियाद पूरी होगी त्रिवेन्द्र सरकार?

न सड़क, न संचार, न चिकित्सा की व्यवस्था.

दम फुला देती है 20 किमी की दुर्गम पैदल दूरी.                                         

बोलता उत्तराखंड पर ख़बर पुरोला से है और बात आज जनपद उत्तरकाशी के विकास खण्ड पुरोला के सीमांत गाँवों में निवास करने वाले ग्रमीणों की है जो आज भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जीवन यापन करने को मजबूर हैं। आपको बता दे की राज्य निर्माण के 18 साल बाद भी इन गाँवों में निवास करने वाले लोग दूर संचार क्रांति के इस युग में जहाँ दूर संचार सेवा से वंचित है वही आयुष प्रदेश में बदहाल पड़ीं स्वास्थ्य सेवाओं के चलते स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है। मेट्रो के इस युग में एक मेटल रोड़ तक नहीं बन पाई है और न ही नौनिहालो के शिक्षा की उचित व्यवस्था है। जी हाँ ऐसे ही कुछ हाल है सर बडियार पट्टी के लगभग 8 गाँव के ।
यहा सड़क सुविधा न होने से जनता 20 किलोमीटर की पैदल दूरी नाप कर गुन्दियाटगांव पहुंचते हैं इसके बाद दस किलोमीटर गाड़ी का रास्ता तय करके पुरोला तहसील या बाजार पहुंचकर अपनी आम जरूरतों को पूरा करते हैं। इस क्षेत्र में दो नदियां बहती हैं केदार गंगा और सरूताल गंगा जो भारी वर्षा के कारण उफान पर रहती हैं ओर बरसात मैं कहे या साल भर मे से 6 महीने यहा आने जाने के पैदल रास्ते जगह जगह भूस्खलन की वजह से क्षतिग्रस्त होते रहते है
इस क्षेत्र के आठ गांव – .डिगाड़ी ,.सर लेवटाडी,कसलो किमडार,पौन्टी, गोल ,छानिका और बडियाड में लगभग पंद्रह सौ की आबादी निवास करती है।जो जोखिम भरा जीवन जीने को मजबूर है। बडियाड की जनता बरसात के महीने बड़े ही कठिनाई के साथ व्यतीत करती है ।ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा और परेशानियों से शासन प्रशासन को हर बार कई बार अवगत करवाया लेकिन सरकारी उपेक्षा कहे या प्रशासन की मनमौजी चाल के चलते ऐसा लगता है कि सरकार का सीमांत वासियों की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। चुनावी नेता भी चुनाव के दौरान जनता को हैलीकॉप्टर के दर्शन करवाकर कोरी घोषणा का घूंट पिला कर नौ दो ग्यारह हो जाते है। जनप्रतिनिधि जनता का समर्थन और वोट हासिल करने के लिए उन्हें आश्वासनों की अफीम चटाकर ओर जहाज़ की धूल उडाकर चले जाते हैं।चुनाव जीतने के बाद जनप्रतिनिधि बोरिया-बिस्तर बांधकर सुविधाजनक स्थानो पर सुविधाओं और सरकारी योजनाओं का लाभ खुद उठा रहें है।और ग्रामीणों को उनकी हालत पर अक्सर छोड़ दिया जाता है। यहा पुल के अभाव में बल्लियों के सहारे जान जोखिम में डालकर गाड़ गदेरों को पार करना, स्वास्थ्य,शिक्षा की बदहाल हालत, दूरसंचार सेवा और सड़क मार्ग के अभाव में जीवन यापन करना यहाँ के लोगों की अब नियति सी बन चुकी है। अब बोलता है उत्तराखंण्ड की बोलता उत्तराखंड वेब न्यूज़ पोट्रल चैनल और वेबसाइट का जन्म पहाड़ के दुख दर्द को सरकार के आगे ले जाने के लिए ही हुवा है। इसलिए बोलता उत्तराखंड पहाड़ की हर समस्या को बोलता उत्तराखंड मस मंच देकर जगह देकर सरकार के कानों तक पहुँचा रहा है ताकि सरकार सुध ले इन गाँव की ओर बदले इस गाँव के हालात ।मुख्य मन्त्री त्रिवेन्द्र रावत से उम्मीद करते है कि वो क्षेत्र के विधायक से पूरी जानकारी लेकर इन सीमांत वासियों के प्रति 1500 गाँव वालों के लिए उम्मीद की किरण इनको दिखायेंगे क्योकि इनको सिर्फ विकास की किरण की जरूरत है बाकी उजाला ये खुद तलास लगे इतना दम है मेरे ओर आपके पहाड़ के लोगो मे । बस अब देखना ये ही है कि सरकार कैसे ओर कब इनके दुखो को दूर करने का प्रयास करती है ।                                                    एक महत्वपूर्ण बात बोलता उत्तराखंड के मज़दूर पत्रकार रतन नेगी को पहाड़ की हर आवाज़ उठानी है ।और सरकार तक पहुचानी  है ताकि मेरे आपके तेरे ,  पहाड़ मे  अब विकास नाम सिर्फ पेट मे ही ना रहे बल्कि जन्म भी ले ।अगर पहाड़ की कोई भी समस्या दिकत किसी भी गाँव की जिले की आपके पास है तो आप मुझे 9756545656 पर वटसप कर सकते है क्योकि आप सब है बोलता उत्तराखंड के हाथ और पैर ,मुह आँख ओर नाक कानहै ।मुझे वटसप करे और समस्या की दो से 4 फ़ोटो के साथ भेज दे ।अगर आप चाहते है कि आपका नाम आये तो आएगा और नही चाहते तो गुप्त रखा जाएगा । आओ हम सब मिलकर बने पहाड़ की आवाज़।

बोलता उत्तराखंड ( रतन नेगी ) 9756545656

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