आज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने
कहा कि भाजपा अध्यक्ष बंशीधर भगत रामलीला में दशरथ का पाठ करते हैं, मगर बहुधा संवाद रावण वाले बोल जाते हैं।
वो चाहते हैं कि, मैं प्रायश्चित करूं, भगत जी मैं निश्चित तौर पर 2022 में कांग्रेस की सरकार वापस लाकर प्रायश्चित करूंगा।

आपने बहुत ठीक कहा कि, मेरी कुछ कमियां रह गई, जिन कमियों के कारण 2017 में उत्तराखंड में मेरे बाद कुछ भी काम न करने वाली सरकार आयी।
रामपुर तिराहा कांड में कौन दोषी है, इस विषय में मुझसे पूछने के बजाय, उस समय के सतपाल महाराज के बयानों को जरा सा पढ़ लीजियेगा और यदि आपको वो बयान खोजने के बाद भी ना मिलें तो , इतना जरा याद कर लीजियेगा कि, रामपुर तिराहा कांड का एक अभियुक्त, आपके किस नेता का जो मुख्यमंत्री भी रहे, केन्द्र में मंत्री भी रहे, उनके प्राइवेट सेक्रेटरी रहे हैं और जिस दिन आप इस सत्य को खोज लेंगे तो फिर रामपुर तिराहा कांड में भाजपा की भूमिका के लिये, आपके पास माफी मांगने के अलावा कोई रास्ता नहीं रहेगा।
आप मुझसे कहते हैं कि केंद्रीय मंत्री के रूप में क्या किया, मैं तो जमरानी को नेशनल प्रोजेक्ट के रूप में राज्य को देकर के गया, मगर आपके नाम राशि जब वहां से नेता बने, तो उन्होंने एचएमटी को जो हमारी शान थी उसको बंद करवा दिया, आईडीपीएल जो हमारी शान थी उसको बंद करवा दिया, बस्ता बड़ा लंबा है, आपकी पार्टी के और आपके नेताओं के कुछ न करने का, तो आगे जितना खुलावोगे उतना खुलता जायेगा बेहतर यह है कि मां गंगा को स्क्रैप चैनल के सन्दर्भ में जो निर्णय उस समय लिया गया, वो उस समय के जनहित को देख कर लिया गया, अब हम सबके भावात्मक हित में आप उस निर्णय को वापस करवाईये, उसको रद्द करवाईये।


इसके बाद
सतपाल महाराज का बयान आया
उन्होने कहा कि
दूसरों के बयानों में रूचि लेने के बजाय अन्य गलतियों के लिए भी माफी मांगे हरीश रावत

जल संसाधन मंत्री रहते ग्लेशियरों की स्टडी में क्यों नहीं ली रुचि

जी हा उत्तराखंड के पर्यटन धर्मस्व संस्कृति व सिंचाई मंत्री सतपाल महाराज ने कहा है कि दूसरों के बयानों में रुचि लेने और नसीहत देने के बजाय कांग्रेसी नेता हरीश रावत को पहले अपने गिरेबान में झांकना चाहिए। उन्होंने गंगा को नहर बताने की गलती करने की माफी तो मांग ली है लेकिन वह यह भी बताएं कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान और कितनी गलतियां की हैं।
सतपाल महाराज ने कहा है कि गंगा के बजाय हरीश रावत ने प्रॉपर्टी डीलरों को महत्व देकर गंगा को नहर बना दिया जिससे उनकी मानसिकता और ज्ञान का पता स्वतः ही चल जाता है। महाराज ने कहा कि हालांकि उन्होंने माफी मांगी है पर गंगा मां ने उन्हें दंड तो दे ही दिया। वह दो जगह से चुनाव लड़े और दोनों जगह से हार गए। उन्होंने कहा कि ऐसा कभी नहीं होता कि जो मुख्यमंत्री सड़क पर बैठकर जलेबियां खाता हो, पान की दुकान में पान खाता हो, लोगों के कंधे पर हाथ रखता हो, कान के नजदीक मुंह ले जाकर यह जताने की कोशिश करता हो कि वह उनका कितना खासम खास है। इस प्रकार की आडंबरी राजनीति कर रायता फैलाने वाले कांग्रेसी नेता हरीश रावत क्या इस बात का जवाब देगें कि जब वह केन्द्र में जल संसाधन मंत्री थे तो उन्होंने ग्लेशियरों की स्टडी करवाने में रुचि क्यों नहीं दिखाई।
सतपाल महाराज ने कहा कि हरीश रावत जब केंद्रीय जल संसाधन मंत्री थे उस समय पहाड़ के ग्लेशियरों का अध्ययन होना चाहिए था यदि वह ग्लेशियरों का अध्ययन करवाते तो हम 2013 की त्रासदी को भी पलट सकते थे। महाराज ने कहा कि आज उन्होंने इंडियन हाइड्रोलॉजिक के तहत एक सेक्शन बनाकर इसका अध्ययन शुरू कर दिया है। महाराज ने कहा कि वाडिया इंस्टीट्यूट के भूगर्भ शास्त्री ने 2013 की आपदा से पूर्व चेताया था कि अगर चोराबारी ग्लेशियर फटता है तो पूरी केदारपुरी बह जाएगी। लेकिन उनकी चेतावनी को अनदेखा करने साथ-साथ तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री हरीश रावत ने कभी भी ग्लेशियरों का अध्ययन करने की कोशिश नहीं की तो क्या वह इस गलती के लिए भी माफी मांगेंगे
महाराज ने कहा जिस व्यक्ति का उत्तराखंड राज्य आन्दोलन से दूर दूर तक कोई वास्ता न रहा हो आखिरकार उसे आज रामपुर तिराहे की याद कैसे आ गई।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का संडे स्पेशल बयान

Posted by बोलता उत्तराखंड़ on Sunday, July 19, 2020


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