होउ यांकी – नेपाल में चीन की राजदूत जो नेपाल के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सेनाध्यक्ष से सीधे संवाद रखती है और सीधे जिनपिंग से निर्देशित होती है।

जिसकी बदौलत चीन नेपाल में अपने एजेंडे में सफल होता दिख रहा है। जिसकी शह पर भारत-नेपाल के बीच लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और काला पानी का अनावश्यक विवाद खड़ा किया गया,

सीमा पर नेपाली सेना खड़ी की गयी तथा भारतीय इलाकों को नेपाल में दर्शाते नक्शे को नेपाली संसद की मंजूरी ऐसी बड़ी घटनाएं है जो होउ यांकी की नेपाल में दबदबे को बताती है। इस नक्शे के विवाद में जनता समाजवादी पार्टी की सांसद सरिता गिरी की सदस्यता तक बर्खास्त कर दी गई है।


आम नेपाली इन भारत विरोधी घटनाओं से नाखुश है। वह भारतीयों की तरह ही दोनों देशों के बीच मधुर संबंध देखना चाहता है। केपी शर्मा ओली की कुर्सी मई में खतरे में पड़ गई थी तो होउ यांकी ने प्रचंड दहल को मना कर केपी शर्मा ओली की कुर्सी बचाई क्योंकि कम्युनिस्ट चीन की कोशिश है कि हरहाल में नेपाल की कम्युनिस्ट सरकार चलती रहे ताकि भारत विरोधी मंसूबे सफल हो सकें।

आम नेपाली नागरिक का मानना है कि नेपाल में सत्ता बदलते ही भारत नेपाल सम्बन्ध पुनः पहले की तरह सामान्य हो जायेंगे।

आपको बता दे कि लेखक स्वत्रंत पत्रकार है और भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय मीडिया टीम के सदस्य हैं)


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