उत्तराखंड के पहाड़ मैं नदियों का ये रूप , 9 जिलो मैं कल अवकाश , 20 से अधिक लोग लापता अलग अलग जगह 5 से अधिक की मौत, पर बढ़ सकता है ये मौत का आंकड़ा ! रात 9 बजे तक कि अपडेट

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: उत्तराखण्ड के पहाड़ मैं नदिया विकराल रूप ले चुकी है बारिश ने पूरे पहाड़ी इलाको का जन-जीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। पहाड़ों की रानी मसूरी में भी कैंपटी-यमुनोत्री मार्ग भारी भूस्खलन के बाद बंद हो रहा है और खुल रहा है और फिर बंद हो रहा है वही
नई टिहरी सहित उसके आसपास के क्षेत्रों में भी बारिश का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री हाईवे ओजरी डबरकोट में भी बंद हो गया है। यमुना नदी के साथ-साथ सहायक नदी -नाले भी उफान पर हैं। चमोली जिले में भी भारी बारिश के चलते बदरीनाथ नेशनल हाईवे लामबगड़ और पीपलकोटी से टंगणी मे अवरुद्ध हो गया है। वहीं चंपावत में भी धौन के पास हाईवे मलबा आने से रास्ता बंद हो रखा है


वही मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने से कई लोगों की मौत हो गई! और दर्जनों मकान पानी के सैलाब में समा गए। क्षेत्र में अलग-अलग जगह 18 से 20 लोगों के बहने और मलबे में दबने की सूचना अभी तक मिल रही है, हालांकि इनमें से दो लोंगों के शव मिले हैं, प्रशासन ने अभी उन्हीं की मौत की पुष्टि की है।
आपको बता दे कि
अभी तक इस तरफ दर्जनों संपर्क मार्ग व पुल बहने से सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव-घरों में ही कैद हैं। पेयजल और बिजली की लाइनें टूटने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं।तो आपदा प्रबंधन टीमें भी संपर्क मार्ग कटे होने के कारण जगह-जगह फंसी हुई हैं, जिस क राहत व बचाव कार्य करने मे ओर ग्राउंड जीरो तक पहुचने मैं दिक्कत हो रही है।
वही खबर है कि जिले के मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में बादल फटने के बाद माकुड़ी गांव के गदेरे में आए उफान से कई मकान जमींदोज हो गए। निकटवर्ती मौंडा गांव निवासी आशीष चौहान ने बताया कि माकुड़ी में सरोजनी देवी पत्नी उपेंद्र सिंह के साथ ही एक अन्य भवन में चतर सिंह के परिवार के चार सदस्यों के मलबे में दबने की सूचना है।
वही जानकारी अनुसार
इन गांवों से नीचे टिकोची बाजार में मलबा घुसने से यहां राजकीय इंटर कालेज भवन के साथ ही एक दर्जन से अधिक आवासीय एवं व्यवसायिक भवन मलबे की भेंट चढ़ गए हैं। यहां सड़क पर खड़े कई वाहन भी उफान में बह गए। ग्रामीणों ने पहाड़ी की ओर भाग कर अपनी जान बचाई, अभी कुछ लोगों के बाढ़ में बहने या मलबे में दबने की आशंका जताई जा रही है। तो आराकोट खड्ड में आए उफान से पाबर नदी का प्रवाह अवरुद्ध होने पर नदी का पानी आराकोट बाजार में घुस गया। यहां एक भवन में रह रहे राइंका आराकोट में प्रवक्ता बृजेंद्र कुमार उनकी बेटी संगीता और बेसिक स्कूल डगोली में तैनात शिक्षामित्र मोहन लाल की पत्नी सोमा देवी मलबे में दब गईं। इनमें सोमा देवी का शव बरामद हो गया है। आराकोट में ही एक अन्य व्यक्ति का शव बरामद हुआ है। इसकी पहचान नेपाल मूल के कालूराम के रूप में हुई है।
ख़बर है कि इस क्षेत्र के माकुड़ी, चिवां, मौंडा, बलावट, खक्वाड़ी, टिकोची, आराकोट, डगोली, गोकुल, दुचाणू, मैंजणी, जागटा आदि गांवों को आने-जाने वाले संपर्क मार्ग भी नहीं बचे, जिससे सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव में ही कैद होकर रह गए हैं। प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें इन गांवों तक पहुंचने के प्रयास में जुटी हुई है।
वही नदियों के उफान पर होने से अभी तक त्यूनी में 35 परिवारों को शिफ्ट किया गया है
बता दे कि अलकनंदा, पिण्डर, धोली,नंदाकनी, बालखिला नदियां तेज़ उफान पर हैं। वहीं, सडकों पर मलबा आने से चमोली में भी दर्जन भर सडकें बंद हैं। गंगोत्री राजमार्ग चुंगी-बड़ेथी के पास मलबा और पत्थर आने से बंद हो रखा है कभी खुल रहा है फिर मलबा आने से बंद हो रहा है
बारिश के चलते रामबाड़ा में मंदाकिनी नदी पर बना पुराना झूला पुल टूटा गया है वही उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद हुए भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे नंदप्रयाग, क्षेत्रपाल, पीपलकोटी, लामबगड़ और कंचन गंगा में बंद हो गया है जिससे बदरीनाथ धाम में 800 से अधिक तीर्थयात्री रोके गए हैं जबकि प्रशासन की ओर से बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्रियों को भी जोशीमठ, पांडुकेश्वर और गोविंदघाट
रविवार को दिनभर बारिश के कारण रोक दिया गया है
वही अलकनंदा के साथ ही पिंडर, नंदाकिनी, धौली गंगा और चुफलागाड़ उफान पर बह रही हैं हालांकि नदियां अभी खतरे के निशान से कुछ नीचे बह रही हैं। अलकनंदा 955.20 मीटर पर बह रही है। इसका डेंजर लेवल 597.42 है जबकि नंदाकिनी 868.48 पर बह रही है। इसका खतरे का लेवल 871.50 मीटर है। पिंडर भी 768.91 मीटर पर बह रही है जबकि इसका खतरे का लेवल 773 मीटर है।
तो भारी बारिश के भारी अलर्ट के बीच देहरादून में जिलाधिकारी ने सोमवार की छुट्टी की घोषणा की है। इस दौरान सभी निजी और सरकारी स्कूल (12वीं तक) बंद रहेंगे। इसके अलावा सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद रखने के आदेश जारी हुए हैं।
वहीं, चमोली जिले में जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने कक्षा 1 से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में 19 अगस्त को छुट्टी का आदेश जारी किया है जबकि स्कूलों के सभी प्रधानाध्यापक और अध्यापकों सहित सभी कर्मचारी समयानुसार अपने कार्यालयों में ही यथावत बने रहेंगे। टिहरी में भी 19 अगस्त को स्कूल बंद रहेंगे।
तो चंपावत में भी बारिश के अलर्ट को लेकर डीएम ने सोमवार को सभी इंटर तक के स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्रों को बंद रखने के निर्देश दिए हैं। उधर, कुमाऊं में भी मौसम विभाग से जारी चेतावनी के बाद नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा के जिलाधिकारियों ने सोमवार को सभी शासकीय, अर्धशासकीय, निजी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया है।  प्रधानाचार्य, शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मी, मिनिस्ट्रीयल व अन्य कार्मिक निर्धारित समय पर स्कूल और ऑफिसों मैं रहेगे तो वही उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद और भारतीय जनता पार्टी के मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी ने उत्तरकाशी और चमोली सहित राज्य के विभिन्न भागों से अतिवृष्टि के आ रहे समाचारों पर चिंता जताई है। उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव श्री उत्पल कुमार सिंह से राज्य में हो रही अतिवृष्टि और आपदा के संबंध में दूरभाष पर जानकारी मांगी।*
बलूनी ने कहा की प्रदेश सरकार से जो भी सहयोग केंद्र से मांगा जाएगा वह प्रदान किया जाएगा। सोशल मीडिया में चल रहे आपदा के समाचार और अपलोड वीडियो बेहद भयावह और डरावने हैं, ऐसी स्थिति में सबसे पहली प्राथमिकता जन धन और पशुधन की की रक्षा करना आवश्यक है। उत्तराखण्ड में बरसात के समय नालों का उफान नदियों का जलस्तर बढ़ना और बादल फटने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है।कुछ वर्षों से अनेक हृदय विदारक घटनाएं घट रही है बलूनी ने कहा कि उन्होंने मुख्य सचिव से जानकारी मांगी है कि वर्तमान हालात में केंद्र सरकार की क्या सहायता राज्य को चाहिए वह तत्काल उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मौसम के आंकलन और नदियों के स्वभाव व जल स्तर के आधार पर अध्ययन किया जाना चाहिए ताकि नदी और नालों के किनारे रहने वाली आबादी को समय समय पूर्व सूचित किया जा सके और महत्वपूर्ण जन जीवन की रक्षा हो सके।
तो दूसरी तरफ मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत खुद राज्य के आला अधिकारियों से लेकर जिले के जिलाधिकारी से फोन पर बात कर रहे है उन्हें उचित दिशा निर्देश दे रहे है।
हर हाल मैं राहत व बचाव कार्य तत्काल हो उसके लिए निर्देश दे रहे है आपदा से रिलेटेड सभी अधिकारियों से खुद बात कर मॉनिटरिंग की जा रही है और जरूरत पड़ने मोसम खुलते ही हेलीकॉप्टर से राहत पहुचाई जाएगी ।वही मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि नुकसान का पूरा आकलन होने के बाद ही केंद्र से आर्थिक राशि की जरूरत हुयी तो मागी जाएगी अभी आकलन जारी है और सबसे पहले लोगो को सुरक्षा देना महत्वपूर्ण इसलिए उस पर ही सरकार का फ़ोकस है।

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