गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

 

श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के कर्मचारियों
ने पेश की ईमानदारी की मिसाल

मरीज़ के तीमारदार के बाइस हजार रुपये व पर्स लौटाया

फिर तीमारदार ने अस्पताल प्रबन्धन व कर्मचारियों का जताया आभार

देहरादून।

वो कहते है ना कि जिंदगी को खुलकर जीने के लिए एक छोटा सा उसूल बनाईए,
नेकी कर बन मददगार, मसीहा बन जाईए यह लाइनें उन लोगों के लिए एकदम मुफीद बैठती हैं जो बिना किसी लाग लपेट के हमेशा दूसरों की मदद के लिए आगे रहते हैं।
ओर ऐसे लोग आपके हमारे आसपास ही होते हैं
और समय समय पर वे मसीहा बनकर एक दूसरे की मदद कर जाते हैं।
ईमानदारी की बातें तो हर कोई करता है, लेकिन सच में कौन कितना ईमानदार है यह तो समय आने पर ही पता चलता है।
ईमानदारी आपकी बातो के साथ साथ आपके काम में भी दिखनी चाहिए।

ऐसे ही एक वाकया हमको शुक्रवार को श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में देखने को मिला।

जानकारी अनुसार
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में भर्ती श्रीमती शोभा के पुत्र जयदीप कुमार शुक्रवार सुबह रिसेप्शन एरिया में खड़े थे, तभी अचानक जेब से उनका पर्स कहीं गिर गया,
ओर उन्हें इस बात का आभास तक नहीं हुआ कि पर्स जेब से गिर चुका है।
उस पर्स में बाईस हज़ार रुपये की रकम व आवश्यक कार्डस आदि थे,
जब उन्हें पर्स गुम होने का अंदेशा हुआ तो आप समंझ सकते है दिल ओर दिमाग पर क्या बीतती है ख़ास कर तब जब उस पर्स मैं रखे पैसे से माँ का इलाज होना हो बस क्या उनके होश उड़ गए।

अब आज के दौर मैं बहुत से लोगो को अगर 500 से लेकर 2000 का नोट भी मिल जाये तो
भला कौन बताता है ये बात ।

इस बीच अस्पताल के रिसेप्शन एरिया में तैनात अस्पताल कर्मी सोहन सिंह ग्वाडी को पर्स मिल गया। ओर इस पर्स में लगभग बाइस हज़ार रुपये व जरूरी कार्डस थे। कार्डस देखकर उन्हें पर्स के मालिक का नाम जयदीप मालूम पड़ा। उन्होंने पूछताछ काउंटर की स्टाफ मोनिका को इस बात की सूचना दी।
रिसेप्शन स्टाफ संगीता गुसाईं ने एनाउंसमेंट कर जयदीप कुमार को बुलवाया व उन्हें उनका पर्स, रकम व जरूरी कार्ड उपलब्ध करवाए।

बस फिर क्या था जयदीप के मुरझाए चेहरे पर सकून की मुस्कुराहट दिखने लगी
ओर उन्होंने अस्पताल कर्मचारियेां की ईमानदारी की भूरी-भूरी प्रशंसा की।
ओर उन्होंने त्वरित कार्रवाई के लिए अस्पताल प्रशासन का आभार जताया।
अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ विनय राय ने कहा कि अस्पताल कर्मचारियों द्वारा मरीजों व तीमारदारों की हर सम्भव मदद की जाती है। उन्होंने जयदीप कुमार की मदद करने वाले अस्पताल कर्मियों को शाबाशी भी दी।
बहराल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डाॅ विनय राय जी
सिर्फ शाबाशी से बात नही बनती
आपको उन सभी को उपहार स्वरूप कुछ भेंट देनी चाइए ।
उनको इनाम मिलना चाइए ताकि
वे सभी स्टाफ के लिए प्रेणा दायक बने व हम सब भी समय आने पर उनका ,अनुसरण कर सके

गुरुर्ब्रह्मा ग्रुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः । गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः ॥

 भावार्थ :

गुरु ब्रह्मा है, गुरु विष्णु है, गुरु हि शंकर है; गुरु हि साक्षात् परब्रह्म है; उन सद्गुरु को प्रणाम ।

ओर उन्ही गुरु के नाम से जनकल्याण के लिए श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज जी ने इस अस्पताल की नींव रखी ताकि

सबकी सेवा की जा सके , हर जरुतमद को उपचार मिल सके ,
स्वास्थ्य के क्षेत्र मैं आज अपने
ब्रह्मलीन गुरु जी के सपने को साकार किया है श्री महंत जी ने जिसे वे लगातार आगे बढ़ा रहे है
ओर आज हम सबको गुरु श्री महंत देवन्द्र दास जी महाराज जी के नेतृत्व में उनके दिशा निर्देश मैं काम करने का अवसर मिल रहा है ये हमारा शोभाग्य है
इसलिए गुरु श्री महंत देवेन्द्र दास जी की दी हुई सीख की बदौलत , मिशन में ईमानदार ,
सोहन सिंह ग्वाडी ओर उनके जैसे वे साथी जुड़े है जिन पर मिशन को तो नाज़ होगा ही  पर  बोलता उत्तराखंड  न्यूज़ को भी आप पर  गर्व है।क्योकि आप मे ही बसा उत्तराखंड है।

 



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