इस निर्णय से अधिकारियों को कर्मचारियों का उत्पीड़न करने का एक हथियार मिल जाएगा।

सरकार के अनिवार्य सेवानिवृत्ति के निर्णय का विरोध।
50 साल से अधिक उम्र के सरकारी कर्मचारियों को खराब प्रदर्शन के आधार पर अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने के लिए विभागवार स्क्रीनिंग समितियां नए सिरे से बनाई जाएंगी फिर इनकी सिफारिश पर तय डेडलाइन के मुताबिक अगले साल 15 जनवरी तक चिन्हित कार्मिकों को अनिवार्य तौर पर सेवानिवृत्त कर दिया जाएगा राज्य सरकार के कामकाज में खराब प्रदर्शन पर कर्मचारियों की सेवा समाप्ति को नए सिरे से डेडलाइन तय कर दी गई है बीते साल भी सरकार ने इस दिशा में कुछ कदम उठाए थे तब छिटपुट मामलों को छोड़कर कहीं भी अनिवार्य सेवानिवृत्ति की कसरत आगे नहीं बढ़ी थी अब सरकार ने नए सिरे से समितियों का गठन करते हुए नवंबर तक होमवर्क को पूरा करने के निर्देश दिए हैं इसके बाद 15 जनवरी तक 50 साल से अधिक उम्र वाले कर्मचारियों को 3 महीने का नोटिस देकर अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी।
जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष विनोद थापा, महामंत्री राजेंद्र प्रसाद बहुगुणा तथा कोषाध्यक्ष सतीश घिल्डियाल ने सरकार के इस निर्णय का कड़ा विरोध किया है उन्होंने कहा कि पचास साल की उम्र में व्यक्ति पर सबसे ज्यादा जिम्मेदारियां होती है , ऐसे समय में आर्थिक स्थिति मजबूत होनी बहुत आवश्यक होती है। 50 साल का कार्मिक तो सरकार के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होता है उसके अनुभवों का लाभ लिया जाना चाहिए।
उन्होंने ने कहां की अनिवार्य सेवानिवृत्ति की आड़ में उत्पीड़न हुआ तो शिक्षक इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे प्रदेश के समस्त कर्मचारी शिक्षक इसको लेकर व्यापक आंदोलन चलाएंगे।


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