उतर भारत के लोकप्रिय श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में 88 वर्षीय वृद्ध
की सफल बाईपास सर्जरी से मिला उनको नया जीवन

डाॅ अशोक कुमार जयंत व पूरी टीम ने की वृद्ध की सफल बाईपास हार्ट सर्जरी बधाई पूरी टीम को।

महत्वपूर्ण बात : उत्तराखण्ड में वयोवृद्ध व्यक्ति की जटिल बाईपास हार्ट सर्जरी का पहला मामला

आज आपरेशन के बाद मरीज़ स्वस्थ, जी रहे हैं सामान्य जीवन।

 

जी हा लोकप्रिय श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के वरिष्ठ हार्ट सर्जन डाॅ अशोक कुमार जयंत ने 88 साल के वृद्ध की सफल बाईपास सर्जरी कर उन्हें नया जीवन दिया है। उत्तराखण्ड में यह पहला ऐसा मामला है जिसमें 88 वर्षीय किसी वृद्ध की इतनी जटिल सफल बाईपास सर्जरी हुई हो।
श्री कश्मीर सिंह (88 साल ) निवासी देहरादून को लंबे समय से सीने में दर्द सांस की तकलीफ व पैरों की सूजन की समस्या थी। गम्भीर बीमारी की वजह से वह कुछ कदम भी नहीं चल पाते थे। फिर परिजन उन्हें लोकप्रिय श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल लेकर पहुंचे।
काॅर्डियो थोरेसिक वैस्क्यूलन सर्जरी विभाग के प्रमुख डाॅ अशोक कुमार जयंत ने उन्हें चिकित्सकीय परामर्श दिया। एंजियोग्राफी जाॅच में पाया गया कि उनके ह्दय में सभी तीनों मुख्य धमनियों तथा उनकी शाखाओं में 90 प्रतिशत या उससे अधिक अवरोध आ चुका है।
जिसके परिणाम स्वरूप उनके ह्दय की मांसपेशी में खून के संचालन और आॅक्सीजन की बहुत कमी हो गई थी। जिस से ह्दय की पप्पिंग में उत्पन्न बाधा के कारण सम्पूर्णं शरीर में खून की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। शरीर के विभिन्न अंगों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था और इस कारण मरीज की जान कभी भी जा सकती थी।
एंजियोग्राफी से यह भी ज्ञात हुआ कि सभी मुख्य धमनियों की रूकावटों में कैल्शियम (पथरी) के जमाव के कारण एंजियोप्लास्टी द्वारा खोलना सम्भव नहीं था और एंजियोप्लास्टी का प्रयास खतरनाक व जानलेवा भी हो सकता था।
डाॅ अशोक कुमार जयंत जो कि श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के हार्ट सर्जरी के विभाग के प्रमुख हैं, ने बाईपास सर्जरी की सलाह दी।
ओर मरीज़ की 88 वर्ष की उम्र देखते हुए रिश्तेदारों के लिए बाईपास सर्जरी के निर्णय में बहुत संकोच हो रहा था। अत्यधिक वृद्धावस्था में बाईपास सर्जरी या अन्य कोई आॅपरेशन करवाने को लेकर वैसे भी समाज में भ्रांतियां हैं।
डाॅ अशोक कुमार जयंत ने मरीज़ व उनके परिजनों को समझाया कि मरीज़ को अतिशीघ्र बाईपास सर्जरी की आवश्यकता है अन्यथः काफी परेशानियां व जान का खतरा हो सकता है। डाॅ अशोक कुमार जयंत ने उन्हें यह भी आश्वासन दिया कि वह हार्ट सर्जरी के अपने 36 साल के अनुभव में अनेक बार इतने वृद्ध मरीजों का भी सुलतापूर्वक आॅपरेशन कर चुके हैं। परिजनों को यह जानकारी भी दी कि वह आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर धड़कते दिल पर ही बाईपास सर्जरी कर देते हैं। इसलिए दिल की धड़कन को रोककर, शरीर में कृत्रिम रूप से पंपो तथा पाइपों द्वारा रक्तप्रवाह कर हार्ट और सम्पूर्णं शरीर को उस दौरान जिंदा रखने की आवश्यता नहीं पड़ती है । इस तकनीक के फलस्वरूप कृत्रिम रक्त-पंपों के इस्तमेाल से जो विभिन्न प्रकार की जटिलताएं हो सकती हैं, उन जटिल सम्भावनओं से बचा जाता है और मरीज़ की रिकवरी अति शीघ्र होती है। उन्होंने यह भी बताया कि सफल आॅपरेशन के बाद मरीज़ एक स्वस्थ्य जीवन बिना किसी पर आश्रित हुए बिता सकता है। अन्ततः काफी विचार विमर्श के पश्चात रिश्तेदारों ने बाईपास सर्जरी की सहमति दे दी।
ओर फिर
तारीख 3 मार्च 2020 को मरीज़ का सफल आॅपरेशन किया गया।
पाॅच घण्टे तक चले आॅपरेशन के दौरान मरीज़ को पाॅच बाईपास ग्राफ्ट लगाए गए।
पाॅच में से तीन बाईपास ग्राफ्ट्स आट्रियल नसों में निर्मित किए गए और शेष दो बाईपास ग्राफ्ट्स का निर्माण टांग से वीनस नसों से किया गया। यह कार्य भी अपने आप में एक नया कीर्तिमान है। चूंकि अधिकांश काॅर्डियक सर्जन वृद्ध मरीज में बाईपास वीनस नसों से ही निर्मित कर देते हैं । वीनस बाईपास लगने में तो काफी आसान होते हैं, परन्तु उपयोगिता व मरीज़ को लंबे समय तक लाभ पहुंचाने की क्षमता आॅर्टियल नसों से निर्मित बाईपास ग्राफ्टों की तुलना में बेहद कम होती है।
आॅपरेशन पूर्णतः सफल रहा और मरीज़ को रिकवरी के लिए सीटीवीएस आईसीयू में शिफट किया गया। सर्जरी के दूसरे दिन से कश्मीरी सिंह जी ने अपने पैरों पर चलना प्रारम्भ कर दिया। उनकी रिकवरी बहुत अच्छी और तेजी से सम्पन्न हुई। सातवें दिन उन्हें श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल से छुट्टी दे दी गई जिसके पश्चात मरीज़ बिल्कुल स्वस्थ हैं व सामान्य जीवन जी रहे हैं।
सफल सर्जरी के पश्चात मरीज़ और उनके रिश्तेदारों ने लोकप्रिय श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल, डाॅक्टर अशोक कुूमार जयंत व उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया। सर्जरी को सफल बनाने में वरिष्ठ एनेस्थीसियोलाॅजिस्ट डाॅ पराग, डाॅ हरीओम, टेक्नीकल एवम् नर्सिंग स्टाफ का विशेष सहयोग रहा।

वृद्ध मरीजों में बाईपास सर्जरी चुनौतीपूर्णं होती है। अधिक उम्र में ह्दय के साथ साथ शरीर के सभी अंग उम्र के अनुपात में थोड़ा कम काम कर पाते हैं। मेडिकल साइंस में बहुत तेज़ी के साथ परिवर्तन हो रहे हैं। नई तकनीकों ने जटिल हार्ट सर्जरी को बेहद चुनौतीपूर्णं से कम चुनौतीपूर्णं बना दिया है। हमारे श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में उपलब्ध आधुनिक मशीनों, हाईटेक आॅपरेशन थियेटर व कुशल डाॅक्टरों, टेक्नीकल एवम् नर्सिंग स्टाफ की टीम ने आॅपरेशन को सफल बनाने में महत्वपूर्णं मदद की।
ये कहना था डाॅ अशोक कुमार जयंत का जो विभागाध्यक्ष है सीटीवीएस विभाग के (श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल  

 

श्री देवन्द्र दास जी महाराज जी ने
इस सफल सर्जरी के लिए पूरी टीम को बधाई दी ,     श्री देवन्द्र दास जी  महाराज जी ने  डॉक्टरो  की  पूरी टीम को बहुत बधाई दी , शुभ कामनाएं दी  डाॅ अशोक कुमार जयंत व उनकी  पूरी टीम को 

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