17 सालो मे जो नही हुवा वो पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी करेंगे पूरी रिपोर्ट

 

भारतीय जनता पार्टी के राज्य सभा सांसद पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने आज एक अभूतपूर्व फैसला लिया जो आज तक किसी ने नही किया वो अनिल बलूनी ने किया और ये फैसला है कि उत्तराखंड राज्य के एक गैर-आबाद गाँव/निर्जन गाँव, ग्राम – बौर (ब्लॉक दुगड्डा, जनपद पौड़ी गढ़वाल ) को उन्होंने गोद लेने का फैसला किया है। पहाड़ पुत्र अनिल ने कहा कि इस गाँव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लिया गया है, इसके बाद अन्य ऐसे गैर-आबाद गाँव, जहां कोई भी आबदी नहीं रहती है, उनको भी इसी मॉडल पर आबाद करने के प्रयास किये जायेंगे। इस गाँव को पुनर्जीवित करने के लिए मूलभूत सुविधाओं बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और रोजगार से जोड़ा जाएगा ताकि गाँव पुनः पुनर्जीवित होकर अपने पूर्व के स्वरूप में आबाद हो सके। इस संबंध में शीघ्र ही इस गाँव के प्रवासियों के साथ पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी बैठक करेगे ।

बोलता उतराखंड को पहाड़ पुत्र बलूनी ने बताया कि देवभूमि उत्तराखंड में पलायन की समस्या काफी भयावह बनती जा रही है, आप लगातार देख रहे हो और ख़बर लिखते रहते हो कि तमाम गाँव धीरे-धीरे खाली होते जा रहे हैं और राज्य की महान संस्कृति विलुप्ति के कगार पर है। इसलिए अब हमारी जिम्मेदारी बनती है कि हम अपने राज्य की विशिष्ट संस्कृति और परंपरा को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए कटिबद्ध हों। पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने कहा कि निर्जन गाँवों को आबाद करने का यह प्रयास उत्तराखंड के लिए मील का पत्थर साबित होगा। जो नौजवान रोजगार के लिए गाँव छोड़ने को मजबूर हुए हैं, उन्हें वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराकर ‘रिवर्स माइग्रेशन’ के द्वारा गाँवों को आबाद करने की शुरुआत की जा रही है।
इसके साथ ही राज्य सभा सांसद पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी ने कहा कि बौर गांव को अंगीकृत करने के साथ-साथ इन गैर-आबाद ग्रामों के पुनर्जीवन की कार्ययोजना भी तैयार कर ली गई है, जिसके तहत वे उत्तराखण्ड के प्रवासी परिवारों/संगठनों के बीच जाकर संवाद करेंगे। उत्तराखंड के लाखों प्रवासी जो कि दिल्ली, लखनऊ, बरेली, मेरठ, गाजियाबाद, चंडीगढ़, भोपाल, इंदौर, जयपुर, मुंबई आदि शहरों में जाकर बस गए हैं, उन सबसे चर्चा कर गांव के पुनर्जीवन हेतु अनुरोध किया जाएगा और उनकी मांगों के निराकरण हेतु प्रयास किया जाएगा। साथ ही प्रवासियों से संवाद अभियान के माध्यम से उत्तराखंड के कौथीग (मेले), ऋतुपर्व और पारंपरिक आयोजनों को पुनः पुनर्जीवित करने के लिए संपर्क किये जायेंगे।
आपको बता दे कि राज्य के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ होगा कि इस तरह से एक निर्जन गाँव को गोद लेने और उसके पुनर्विकास का प्रयास किया गया हो। ओर यह अपने आप में एक अनूठा कदम है।

  बोलता उतराखंड जितना पहाड़ पुत्र अनिल बलूनी को समझ पाया है जान पाया है उससे ये बात निकलकर आती है कि बलूनी जो कहते है वो करते है और जो ठान लेते है उसको सफल बनाने के लिए हर प्रयास से लेकर अपना सारा अनुभव झोंक देते है ओर जरूरत पड़ने पर हर अनुभवी व्यक्ति से खूब चर्चा भी करते है की कुछ और अच्छा रिजल्ट निकलकर आये।
सुभकामनाये बोलता उतराखंड की अनिल बलूनी जी को कि आप राज्य हित मे पहाड़ हित मे वो भगीरथ प्रयास करने जा रहे है जो पहाड़ के गाँव की दशा और दिशा ही बदल देगी ओर बोलता उत्तराखंड को विस्वास है कि आपका ये महत्वपूर्ण प्रयास जरूर सफल होगा
ओर आपके साथ हर वो व्यक्ति जुड़ेगा जो पहाड़ को जीता हो पहाड़ के लिए मरता हो। पहाड़ के हितों के मुद्दे पर गंदी राजनीति से जूझता हो। क्योंकि उनको आप पर है विस्वास की बलूनी जो कहेगे जो सोचेंगे ओर पहाड़ हित मे जो भी करेगे उसमे बलूनी सफल होंगे
क्योकि यहा नीयत भी साफ है नीतियां भी धरातल पर उतरती है और आपका अनुभव( जल जंगल जमीन) आपको सबसे ख़ास बनाता है तभी तो आप राज्य के हर राजनेताओ से अलग हो ओर अब राज्य की जनता बोल रही है कि हमारे लोकप्रिय सांसद बलूनी जी तो राज्य के सभी सांसदों को आईना दिखाने का काम कर रहे वो बता रहे है कि अगर सोच अच्छी हो और पहाड़ हित के लिए कुछ भी करना हो तो किया जा सकता है।जो हमारे आज तक के सांसदों ने नही किया ।  ओर वो दिन दूर नही जब पूरे राज्य मे  शोर सुनाई देगा कि बलूनी है जरूरी।

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