मुझे कई लोगों के मैसेज और टेलीफोन आ रहे हैं, वो मुझे भराड़ीसैण को लेकर बधाई दे रहे हैं, कह रहे हैं कि, बर्फ के साथ भराड़ीसैण का दृश्य अद्भुत दिखाई दे रहा था। स्थल चयन के लिये, लोग मेरी प्रशंसा कर रहे थे। मगर वास्तविकता यह है कि, स्थल का चयन का श्रेय यदि दिया जाना है, तो वो तत्कालिक हमारे स्पीकर, श्री गोविन्द सिंह कुंजवाल जी और मुझे पता चला है कि, सतपाल महाराज जी ने इस सुझाव को आगे बढ़ाया और श्री अनुसूया प्रसाद मैखुरी जी को दिया जाना चाहिये, विजय बहुगुणा जी मुख्यमंत्री थे, उनको भी यह श्रेय जाता है। मगर मैं, उन सब लोगों को जिन्हें भराड़ीसैण का स्थल पसन्द आ रहा है, बहुत धन्यवाद देना चाहता हूँ। मेरी पसन्द तो गैरसैंण से लगे हुये ढलान थे। बहरहाल मैंने, पहले से ही चयनित स्थान को ही आगे बढ़ाना और वहीं पर विधानसभा भवन बनाना उचित समझा, क्योंकि विलम्ब गैरसैंण के कौज को नुकसान पहुँचा सकता था। आज कोई भी सरकार आये, कोई उसको ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर रहा है, तो कोई कल उसको राजधानी घोषित करेगा। मगर बुनियाद पड़ गई, विधानसभा भवन बनने के साथ अब किसी की हिम्मत नहीं है कि, गैरसैंण को लेकर ना-नुकर कर सके।


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