उत्तराखंड को बने हुए उन्नीस साल पूरे हो चुके है..इस नवंबर में उत्तराखंड बीस साल का पूरा हो जाएगा.. तय है कि इस बार राज्य स्थापना दिवस का जश्न शानदार होगा..

राज्य के इतिहास में ये पहला मौका होगा जब राज्य के माथे से अस्थाई राजधानी का दाग हटेगा!  राज्य के पास ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी..सीएम त्रिवेंद्र रावत ने बजट सत्र के बाद गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर न केवल ऐतिहासिक बल्कि सहासिक फैसला लिया है.. बल्कि  पर्वतपुत्र भी बन गए हैं…

बेशक गैरसैण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया हो…लेकिन त्रिवेंद्र रावत ने गैरसैंण को जिंदा किया है…. उन सवालों के उत्तर तलाशने की बड़ी कोशिश ही.. नही पहल भी की है जिन्हें पिछले उन्नीस  साल में राज्य की सियासत ने भुला दिया था। जिन्होंने राज्य की सत्ता में भागीदारी कर रोजगार पाया, माननीय होने का गौरव हासिल किया लेकिन उस पहाड़ को भूल गए जिसके खेत-खलिहान ने उनके शरीर को पुष्ट किया.. जिनके आंगन में खेलकर वो बड़े हुए। लेकिन पहाड़ की जरूरत क्या है..इसको कैसे आत्मनिर्भर बनाया जाए उसे भूल गए । सत्ता सुंदरी की हसीन बांहों का आकर्षण खोने का डर पिछली हर सरकार को डराता रहा। खामुंखा के शक के सांपों को पैदा किया गया… दीवारों पर कान ही नहीं आभासी मुहं भी बनाए गए कि गैरसैंण को राजधानी बनाएंगे तो उधमसिंहनगर और हरिद्वार खफा हो जाएंगे। सूबे की पहली अंतरिम सरकार ने राजधानी चयन आयोग बनाया.. पहली निर्वाचित तिवाड़ी सरकार ने राजधानी चयन आयोग के कार्यकाल को विस्तार दिया.. तीसरी बी.सी खंडूड़ी की सरकार ने चयन आयोग के कार्यकाल को समाप्त किया और अपनी आठ नौ साल के काम काज को सरकार के हवाले किया..बावजूद इसके गैरसैण उत्तराखंड की स्थाई राजधानी नहीं बन पाई। जबकि इस राज्य की राजधानी समेत राज्य संपति के मामले तो उसी दिन सुलझ जाने चाहिए थे जिस दिन केंद्र की अटल सरकार ने अलग उत्तराखंड राज्य का खाका खींचा था। आज उन्नीस साल बाद अगर त्रिवेंद्र रावत उत्तराखंड के यक्ष प्रश्नों के उत्तर खोजने की कोशिश कर रहे हैं तो उसकी तारीफ होनी चाहिए। सियासत के अस्पताल में पिछले उन्नीस सालों से कोमा में पड़े गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित कर सीएम त्रिवेंद्र रावत ने उस लायक बना दिया है कि दस साल तक सत्ता की मलाई चाटने वाली कांग्रेस अब गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने की बात करने लगी है। धन्यवाद टीएसआर.. गैरसैंण को जिंदा करने के लिए।

 


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