15 अगस्त का दिन इस गाँव के लिए होगा बहुत ख़ास !

बोलता उत्तराखंड आपको बता रहा है एक वो गाँव जिसकी अपनी अलग ही कहानी है ये वो गाँव है जो आज भी मूलभत सुविधाओ से कोसो दूर है जब देश आजद हुवा तब ठीक उसके 5 दिन बाद इन गाँव वालों को पता चला था कि हम आजाद हो गए भारत आज़ाद हो गया ओर तब से लेकर आज तक इनके लिए कोई खास वो दिन नही आया जब ये लोग पूरे जोश जुनून के साथ भारत माता की जयकारे लगा सके और अपनी बात सरकार को कह सके ठीक आमने सामने । लेकिन अब
आजादी के बाद पहली बार इस गांव के लिए खास होने जा रहा है 15 अगस्त का दिन जी हा क्योंकि इस 15 अगस्त को इस गांव में झंडा फहराएंगे मुख्यमंन्त्री त्रिवेन्द्र रावत
ये गाँव उत्तराखंड की ऐसी जगह पर है जंहा शायद ही आज तक कोई मुख्यमंत्री गया हो ऐसा पहली बार होगा कि जब भारत चीन बॉर्डर पर बसे गमशाली गाँव में कोई मुख्यमंत्री या यू कहे की कोई वीआईपी ध्वजा रोहण करेगा। भारत चीन बॉर्डर पर बसे उत्तराखंड के इस गाँव की जनसख्या बेहद कम है बद्रीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट ने सीएम से आग्रह किया और सीएम ने हामी भरने में जरा भी देरी नहीं लगायी। 
आपको बता दे कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत से आज बद्रीनाथ के विधायक महेंद्र भट्ट ने मुलाकात की। इस मुलाकात का मकसद वैसे तो एक दूसरे की विधानसभाओ की समस्या और रूटीन मुलाकात थी। इस मुलाकात में विधायक महेंद्र भट्ट ने सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से आग्रह किया था कि वे 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस पर चमोली जिले के बाड़हाती के नजदीकी गमशाली गांव में झंडारोहण करें। सीएम ने विधायक भट्ट का आग्रह स्वीकार कर लिया। सीएम देहरादून में झंडारोहण के बाद गमशाली जाएंगे। माना जा रहा है कि इस दौरान सीएम वहां लगने वाले स्वतंत्रता दिवस मेले को विशेष मेले का का दर्जा दे सकते हैं। आपको बता दें कि गमशाली राज्य का दूरस्थ गांव हैं। यहां के लोगों को करीब पांच दिन बाद देश के आजाद होने की जानकारी मिली थी। 
आपको बता दे कि ये क्षेत्र बेहद सुदूर इलाके में बसा है। जंहा से आम जनजीवन का या यू कहें कि भारत के दूसरे इलाको की सुचना भी बहुत देरी से मिलती है। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत 15 अगस्त को पहले देहरादून में झंडा फरायेंगे उसके बाद वो गमशाली गांव के लिए रवाना होंगे। आपको बता दें की इस कार्यक्रम में भारतीय सैनिक भी प्रतिभाग करेंगे। 

आपको बोलता उत्तराखंड़ बता रहा है कि इस गाँव के लिए यहा 15 अगस्त का दिन उल्लास लेकर आता हैला मुख्यालय उत्तरकाशी से 76 किमी दूर भागीरथी और जाड़गंगा नदी के संगम पर बसे बगोरी गांव के लोगों इस दिन देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से अपने गांव पहुंचते हैं और सामूहिक रूप से स्वतंत्रता का जश्न मनाते हैं। इस दौरान छोले-पूरी के भोज के साथ पारंपरिक वस्त्रों में लोकनृत्य की प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र होती है।
महत्वपूर्ण जानकारी ये है कि 1962 से पहले यहां के लोग सेना के जवानों के साथ चीन सीमा पर नेलांग में तिरंगा फहराते थे। लेकिन, भारत-चीन युद्ध के समय नेलांग और जादुंग के ग्रामीणों का अपने गांव से नाता टूट गया और वो विस्थापित होकर बगोरी में आ बसे। जिसकी यादें और टीस अब तक लोगों के मन में बसी हुई है। बहराल राज्य के मुख्यमंत्री वहां जायेगे ओर बोलता उत्तराखंड़ उम्मीद भी करता है कि मुख्यमंत्री वहां के लोगो के लिए कुछ विशेष घोषणा भी करेगे क्योकि जब वहां के लोग है तभी हम भी है सुरक्षित। जब गाँव गाँव आबाद रहेगे जब गाँव गाँव बचेगें तभी उत्तराखंड रहेगा खुश हाल क्योकि उन गाँव गाँव के लोगो से ही है मेरे ओर आपके उत्तराखंण्ड की पहचान इसलिये कहता है बोलता है उत्तराखंड़ की गाँव है तो उत्तराखंड है और इस बात को मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत ने समझा इसके लिए बोलता उत्तराखंड़ की तरफ से उनको बहुत बहुत धन्यवाद इस उम्मीद के साथ कि मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र राज्य के हर गाँव गाँव तक पहुचाये विकास की किरण । बद्रीनाथ विधायक महेंद्र भट्ट जी का भी बहुत बहुत धन्यवाद ।

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