आप ओर हमने यू ही एक साल निकाल दिया और जब जब शहादत की ख़बर आई , किसी भारत माता के लाल के शहीद होने की ख़बर आई तो आंखे नम हुई, गर्व हुवा, उनको नमन किया , ओर श्रदांजलि दी जो आज भी जारी है

 

आज से ठीक एक साल पहले
पुलवामा हमले के बाद जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ चले ऑपरेशन में हमारे उत्तराखंड के लाल मेजर विभूति ढौंडियाल शहीद हो गए थे। उनकी शहादत की ख़बर ने दूंन वासियों को रुला दिया था क्योकिं इससे पहले मेजर चित्रेश की शहादत की ख़बर 16 फरवरी को आई थी।
इस एक साल के दौरान राजनेता, पक्ष , विपक्ष उनके परिजनों को बीच बीच मै दिलासा देते नज़र आये ,तो हर सम्भव मदद सरकार परिजनों की करेगे कहती ओर सुनाई दी।
ओर इन 365 के दिन अगर किसी ने कुछ ठानी थी या ठान रखी है तो वो कोई और नही बल्कि
उत्तराखंड के लाल शहीद हुए मेजर विभूति ढौंडियाल जी
की पत्नी है निकिता ढौंडियाल जी हां जानकारी आ रही है कि निकिता ढौंडियाल जी भी अपने शहीद पति
मेजर विभूति ढौंडियाल सर की राह पर चल पड़ी हैं। ओर वे जल्द सेना में अफसर की भूमिका में नजर आएंगी।


जानकारी है कि उन्होंने सभी आवश्यक परीक्षाएं पास कर ली हैं। ओर मीडिया रिपोर्ट्स कह रही है कि वे जल्द सेना ज्वाइन कर सकती हैं
हम सभी जानते है कि पिछले साल जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुआ आतंकी हमला उत्तराखंड को कभी न भूलने वाला जख्म दे गया है। इसमें जहां उत्तराखंड का एक जवान मोहनलाल रतूड़ी शहीद हुए थे। वहीं इसके बाद चले ऑपरेशन में उत्तराखंड ने अपने दो और लाल खो दिए थे। 16 फरवरी को जहां मेजर चित्रेश बिष्ट शहीद हुए थे।
तो वही 18 फरवरी को जैश-एक मोहम्मद के खिलाफ चले ऑपरेशन में मेजर विभूति ढौंडियाल शहीद हुए थे। शहीद मेजर विभूति ढौंडियाल की पहली बरसी आज है ओर आज ही
एक ऐसी खबर आ रही है, जिसे देश का हर नागरिक नमन करेगा।
जी हां शहादत पर ‘आई लव यू विभू’ जैसे मार्मिक शब्दों से पति को अंतिम विदाई देने वाली निकिता जल्द सेना में अफसर नजर आएंगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार
बताया जा रहा है पति की शहादत के बाद निकिता ने आर्मी ज्वाइन करने की इच्छा जताई थी,फिर उसके बाद सेना ने उनका उत्साह बढ़ाया और मदद की। जिसका परिणाम यह हुआ कि निकिता ने सभी औपचारिक टेस्ट और इंटरव्यू पास किए। मूलरूप से पौड़ी के ढौंडी गांव निवासी ढौंडियाल परिवार के लिए मेजर बेटे की शहादत कभी न भरने वाला ज़ख्म है
जानकारी है कि विभूति के पिता स्व. ओमप्रकाश ढौंडियाल के चार बच्चे रहे । इनमें तीन बेटियां है और सबसे छोटा बेटा विभूति था। विभूति की सबसे बड़ी बहन पूजा की शादी हो चुकी है। उनके पति सेना में कर्नल हैं। उनसे छोटी बहन प्रियंका शादी के बाद अमेरिका में रहती हैं। तीसरी बहन वैष्णवी अविवाहित हैं। वह देहरादून के एक स्कूल में पढ़ाती हैं। वर्तमान में विभूति के घर में 95 वर्षीय दादी, मां, पत्नी और एक अविवाहित बहन हैं
परिजन व मित्र बताते है कि शहीद मेजर विभूति को बचपन से ही सेना में जाने का जुनून था। दो बार असफल हुए। लेकिन, फिर सफलता मिली। मेजर बनने के बाद विभूति का जोश व जुनून दोगुना हो गया था। उन्होंने वर्ष 2000 में सेंट जोजेफ्स एकेडमी से 10वीं और 2002 में पाइन हाल स्कूल से 12वीं पास की। इसके बाद डीएवी से बीएससी की।
कक्षा सात से ही विभूति ने सेना में जाने की कोशिशें शुरू कर दी थीं। जब वे सातवीं कक्षा में थे तब उन्होंने राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (आरआईएमसी) में भर्ती की परीक्षा दी। लेकिन चयन नहीं हुआ। 12वीं में एनडीए की परीक्षा दी। लेकिन, चयन नहीं हुआ। ग्रेजुएशन के बाद उनका चयन हुआ और ओटीए चेन्नई में प्रशिक्षण हासिल किया। वर्ष 2012 में पासआउट होकर उन्होंने कमीशन प्राप्त किया।
मेजर विभूति का विवाह 18 अप्रैल 2018 को हुआ था। 19 अप्रैल को पहली बार पत्नी निकिता को लेकर वह डंगवाल मार्ग स्थित अपने घर पहुंचे थे। इसके ठीक दस माह बाद मेजर विभूति शहीद हो गए थे। मेजर विभूति जनवरी के पहले सप्ताह में छुट्टियां खत्म कर डयूटी पर लौटे थे। मार्च में विभूति ने घर आने का वादा किया था।


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