दुःखद खबर रुड़की के
जादूगर रोड से है जहा पर स्कूटी और बुलेट की कल टक्कर होगई जिसके बाद बाइक पेड़ से टकराई ओर उस पर सवार 12वीं के दो छात्रों की दर्दनाक मौत हो गई दुःखद
जानकरीं है कि दोनों छात्र ट्यूशन पढ़कर घर लौट रहे थे इस बीच हादसे में स्कूटी सवार को भी चोट आई है जबकि दोनों ही गाड़ी बुलेट और स्कूटी क्षतिग्रस्त हो गई। छात्रों की मौत से उनके परिजनों में कोहराम मचा हुवा है परिवार सदमे मै है
इस घटज कि सूचना मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंची थी और पूरी घटना की जानकारी ली थी पर ख़बर लिखे जाने तक स्कूटी चालक का पता नहीं चल पाया था
दुःखस है सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र स्थित सोलानीपुरम निवासी प्रणव 18 साल पुत्र राजीव और ढंडेरा डबल फाटक निवासी रक्षित 18 साल पुत्र संजय दुआ मोंटफोर्ट में 12वीं के छात्र थे।
इन दोनों की अच्छी दोस्ती थी और वे स्कूल व ट्यूशन भी साथ आते जाते थे।
लेकिन रविवार को इन्हें क्या मालूम था कि फिर ये घर वापस ना जिज़ तरह लौट पायेंगे।
रक्षित अपनी बुलेट लेकर ट्यूशन के लिए कल निकला था
जानकरीं ये आई कि ट्यूशन के बाद रक्षित और प्रणव बुलेट से जादूगर रोड से लौट रहे थे।
पर जैसे ही उनकी बाइक चर्च के सामने पहुंची तो सामने से आ रही एक स्कूटी से टकरा गई।
फिर स्कूटी से टकराकर बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पेड़ से जा टकराई,
ओर इस कारण दोनों के सिर भी पेड़ से टकरा गए और वे दोनों ही गंभीर रूप से घायल हो गए। तो स्कूटी चालक भी घायल हो गया, जिसे कुछ लोग अपने साथ ले गए। फिर आसपास के लोगों ने इस हादसे की सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने घायल रक्षित को सिविल अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने उसकी हालत नाजुक देख हायर सेंटर रेफर कर दिया, लेकिन उसने रास्ते में ही दम तोड़ दिया था तो प्रणव को एक निजी अस्पताल ले जाया गया। यहां से उसे भी रेफर कर दिया गया ओर था
हायर सेंटर ले जाते समय प्रणव ने भी रास्ते में दम तोड़ दिया
दुःखद सूचना मिलने के बाद से ही दोनों के परिजनों में कोहराम मचा हुवा है।
ओर इसी के साथ एक बार फिर चर्चा वही आरम्भ हो गई जो अक्सर होती है कि हेलमेट पहना भी था या नही
क्योंकि इस हादसे के बाद बुलेट के पास हेलमेट तो मिला है,पर पता नहीं चल पाया कि बुलेट चला रहे रक्षित ने हेलमेट पहना भी था या नहीं। क्योंकि बुलेट के पास मिले हेलमेट पर एक भी निशान नहीं होने से आशंका जताई जा रही है कि उसने हेलमेट नहीं पहना होगा,ये सब तो चलता रहेगा ।
दोनों के परिवार सदमे मैं है और अब लोग कुछ ना कुछ कमियां किसी ना किसी की निकालते नज़र आयेगे ही दुःखद है।
बोलता उत्तराखंड नही जानता कि इस दुर्घटना की असली वजह क्या थी
वो तो बस इतना जानता है कि
18 साल के अपने अपने घर के दो लाडले, घर के चिराग़ कहे या दीपक जो अब बुझ गये है।
है भगवान ये किसी भी परिजनों के साथ क्यो होता है??
कैसे करके वो अपने बच्चों को जैसे तैसे उनके जन्म से लेकर
18 साल तक या फिर इससे आगे भी उनको पालते है , पढ़ाते है , उनके भविष्य के लिए सपने देखते है , अपने बुढ़ापे की लाठी उनको मानते है, आगे चलकर उनकी शादी और ना जाने क्या क्या सपने होते है परिजनों के
माता पिता के, दादा दादी के बहन के भाई के उफ़ ओर जब वो इस तरह दुनिया को छोड़कर चले जाएं तो बस यही निकलती है दिल से बात ऊपर वाले
ऐसा मत करना किसी के भी साथ
अब तू ही उनके परिजनों की हिमत को बड़ा उन्हें ये असहनीय दर्द को सहने की शक्ति दे।
ओर आप ओर हम अपने परिजनों, बच्चों, नाते रिश्तेदार ,
जो भी हमारे हो या पराये
प्यार से कहे जो भी उनसे आपका नाता। या ना भी हो तो कहे ओर खुद भी अमल करें
कि आप हैलमेट को हाथ मैं या गाड़ी मैं सिर्फ पुलिस के डर की वजह या चालान कट जाएग्स इस वजह से साथ लेकर ना चले उसे पहने भी ओर उसका फीता भी बाधे , ओर हेलमेट अच्छे कंपनी का ही पहने ओर ले।
ज़रूरी नहीं कि हर बार आपकी ही गलती हो पर आपके पीछे से या आगे से आने वाले वाहन चालक की गति हो या रफ ड्राइव आदि आदि वे कैसे गाड़ी चला रहे है किन हालत मैं चला रहे है ये हमको नही मालूम होता उनकी वजह से भी बेवजह मासूम मौत के काल मे समा जाते है
इसलिए आप सतर्क रहें और
जब आगे या पीछे चलने वाले ठीक से चलेंगे तो गलतियां ओर हादसे कम होंगे
ओर आप भी हम भी जब सड़क पर चलाते है अपनी गाड़िया तो
उन आगे और पीछे चलने वालो मैं हम ही होते है।
हम सबको अपने मैं सुधार लाने की ज़रूरत है।
निवेदन है आप सबसे।
ज़िंदगी आपकी जरूरी है आपके अपनो के लिए।


LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here