14 साल की सज़ा मिली इस भाई को तीन साल की मासूम के साथ किया था दुष्कर्म

बोलता उत्तराखंड पर आपको एक उस भाई की करतूत बता रहा हूँ जिसने भाई और बहन के रिश्ते को शर्मशार कर दिया था। इस ने अपने चाचा की तीन साल की बेटी के साथ दुष्कर्म किया था। इस दुष्कर्म के आरोपी को पोक्सो कोर्ट ने दोषी मानते हुए इसे 14 साल की सज़ा सुनाई है। और दोषी पर तीस हज़ार का जुर्माना भी लगाया है। यही नही जुर्माना ना देने पर ये 2 साल ओर अधिक सज़ा का भगीदार बनेगा । आपको बता दे कि साल 2016 मे देहरादून के पटेल नगर थाने मे ये पूरा मामला सामने आया था ।। विशेष लोक अभियोजक पोक्सो भरत सिंह ने कहा कि 11 अक्टूबर साल 2016 की रात तीन साल की मासूम अपनी माँ के साथ सोई हुई थी और जब माँ की आँख खोली तो उनकी लाडली बिस्तर पर नही थी। रात को लाडली को तलाशते हुए किसी ने बताया कि पड़ोस मे रहने वाले उसके रिश्ते के भाई दीपू जिसका नाम सुदामा भी है वो लड़की को टॉयलेट कराने के लिए ले गया था उस समय वो विक्रम चलता था। जब पूरी रात तलाशने के बाद भी परिजनों को अपनी तीन साल की मासूम का पता नही चला । लेकिन लगभग सुबह 6 बजे सब्ज़ी की दुकान चलाने वाले ने पुलिस को सूचना दी कि एक मासूम लडकी बिना कपड़ों के लालपुल पर खड़ी है ।जिसके बाद पुलिस उस मासूम को चौकी ले आयी और उसके माता पिता की तलाश कर उस मासूम को उन्हें दे दिया। घर पहुचने के बाद मासूम ने अपनी भाषा मे अपनी बात बताई की लड्डू ओर चॉकलेट देकर उसे अपने साथ ले जाय गया था फिर उसके साथ गलत काम किया । तब परिजनों ने दीपू उर्फ सुदामा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। फिर उस मासूम का मेडिकल कराया गया जिसमें दुष्कर्म की बात निकली ।फिर पुलिस ने उसी दिन ही आरोपी को गिरफ्तार कर लिया था। जिसके बाद मासूम के कपड़े और तौलिया ओर आरोपित का ब्लड सेंपल फोरेंसिक जांच के लिए गया और फिर रिपोट पॉजिटिव निकलकर आई। इस पूरे मामले मे मुख्य न्यायाधीश पोक्सो एक्ट रमा पांडे की आदलत मे सुनवाई हुई ओर अभियोजन की तरफ से 7 गवाह पेश किए गए ।जबकि विपक्ष की ओर से तीन गवाह पेश कर मकान हड़पने के लिए इस प्रकार के आरोप लगाने की बात कही ।मगर वह आरोपो की पुष्टि नही कर पाए । बहराल मासूम को आज इंसाफ मिल गया है और आरोपी को सज़ा । ओर आप सब भी आज से ही रहे सावधान बेटियां के मामले मे ना करे सब पर विस्वास । यदि कोई रख रहा है किसी भी मासूम पर अपनी गंदी नज़र तो देर ना करे और तुरंत पुलिस को सूचित करें। साथ ही अपने बच्चों को अपनी ओर उनकी भाषा मे ही अच्छे और बुरे की पहचान करना सिखाये।

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