हम क्यो सरकार को कोसे? तापमान था -3डिग्री , ओर फिर दर्द में तड़पती गर्भवती ने खेत में दिया बच्ची को जन्म क्या बोलू बधाई हो

300

हमारे उत्तराखंड मे ।
-3 डिग्री तापमान में भी , दर्द में तड़पती गर्भवती ने खेत में दिया बच्ची को जन्म ।


बता दे कि उत्तराखंड मैं  पिथौरागढ़ के मुनस्यारी तहसील के मालूपाती गांव तक सड़क नहीं होने पर गर्भवती महिला को माइनस तीन डिग्री तापमान में खेत में ही शिशु को जन्म देने को मजबूर होना पड़ा ये कोई नई बात नही रह गई अब हर बार पहाड़ की नारी को इस दुःख दर्द के पहाड़ मैं अपने पहाड़ जैसे दर्द को सहकर जीना पड़ता है और बात जब गर्भवती महिलाओं की हो तो इस दौरान उनका दूसरा नही बल्कि पहाड़ भौगोलिक हालातो को देख कर तीसरा जन्म होता है ये हम समझते है मानते है ।
बहराल राहत की बात इस मामले मैं ये है कि जच्चा और बच्चा दोनों ही सुरक्षित हैं।
जानकारी अनुसार
प्रसव से पहले परिजन गर्भवती महिला को डोली में लेकर अस्पताल ले जा रहे थे।
बता दे कि
गिरीश गोस्वामी की पत्नी संगीता देवी को शुक्रवार शाम प्रसव पीड़ा हुई। ओर वे पैदल चलने लायक स्थिति नहीं होने पर संगीता को मुनस्यारी अस्पताल पहुंचाने के लिए गांव के लोग के साथ डोली में बिठाकर चार किलोमीटर दूर चौना के लिए रवाना हुए थे
जानकारी अनुसार
चौना गांव की सड़क तक पहुंचने से पहले ही संगीता को तीव्र पीड़ा होने लगी। इसके बाद दर्द से तड़पती प्रसव पीड़िता को फन्या नामक स्थान पर डोली से उतारकर खेत में लिटाया गया। ओर इस दौरान संगीता ने माइनस तीन डिग्री तापमान में खेत में ही शिशु को जन्म दिया।
फिर प्रसव के बाद ही परिजन उसी डोली से संगीता और नवजात शिशु को लेकर घर चले गए। सामाजिक कार्यकर्ता हीरा सिंह चिराल का कहना है कि एक ओर सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का नारा दे रही है दूसरी ओर गर्भवती महिलाओं को खेतों में प्रसव कराना पड़ रहा है।
बता दे कि यातायात सुविधा से वंचित गांवों को सड़क सुविधा से जोड़ना चाहिए। ग्राम प्रधान हेमा देवी मेहरा ने बताया कि अब तक क्षेत्र में इस तरह के कई मामले हो चुके हैं। प्रसव पीड़िताओं को डोली में बिठाकर अस्पताल पहुंचाना पड़ता है।
तो सुना आपने उत्तराखंड के पहाड़ मैं नवजात का जन्म कभी खेत किनारे तो कभी पुल किनारे होता है । तो कुछ का उन सरकारी अस्पताल मैं जहा व्यवस्था ना के बराबर होती है।
ओर इन सबके बीच कही बात जच्चा बच्चा दोनों ही दुनिया को अलविदा कह देते है ।तो कुछ खुद किस्मत की जान बच जाती है
बाकी
हम क्यो सरकारों को  कोसे
अब तो बारी तुम्हारी है वोट देने तो आपको ही जाना है अब बल साल 2022 मैं

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here