आज दिल्ली मे दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल से तेज़ दौड़ी होगी उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की गाड़ी वो कैसे चलिए आपको बताते है आज सबसे पहले
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट की। भेंट के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री के समक्ष ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के तहत हर खेत को पानी योजना के अन्तर्गत पर्वतीय राज्यों हेतु मानकों में परिवर्तन या शिथिलीकरण प्रदान किये जाने का प्रकरण रखा। जिसमें सरफेस माईनर इरिगेशन स्कीम में नहरों की पुनरोद्धार जीर्णोद्वार, सृदृढीकरण तथा विस्तारीकरण की योजनाओं को भी स्वीकृति प्रदान किये जाने का अनुरोध किया गया।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने पर्वतीय क्षेत्रों में नहर निर्माण की लागत अधिक होने के कारण वर्तमान प्रचलित गाईडलाईन रूपये 2.50 लाख प्रति हैक्टेयर लागत की सीमा को बढ़ाकर 3.50 लाख प्रति हैक्टेयर किये जाने का अनुरोध भी किया। वही मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने 2021 में हरिद्वार में होने वाले महाकुम्भ के दृष्टिगत हरिद्वार में एक सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का जल शक्ति मंत्री से अनुरोध किया। तो केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री ने इसके लिए प्रस्ताव भेजने को कहा।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना’ के अन्तर्गत 651 लघु सिंचाई योजना की अवशेष केन्द्रांश की धनराशि रूपये 63.57 करोड़ की मांग का प्रस्ताव केन्द्र को भेजा गया है, इन निर्माणाधीन योजनाओं को यथाशीघ्र पूर्ण किये जाने हेतु यह धनराशि यथाशीघ्र अवमुक्त किये जाने का उन्होंने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री से अनुरोध किया। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि राज्य की 349.39 करोड़ रूपये की 422 लघु सिंचाई की नई योजनाओं का प्रस्ताव केन्द्रीय जल आयोग, आगरा के माध्यम से भारत सरकार को प्रेषित किया गया है, जिसे 19524 हैक्टेयर सिंचन क्षमता सृजित किये जाने का प्रस्ताव है। उक्त योजना स्वीकृत कर वित्तीय वर्ष 2019-20 में रूपये 27.97 करोड़ केन्द्रांश अवमुक्त किये जाने का भी अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत से भेंट दौरान ‘‘जल जीवन मिशन‘‘ जैसे अंत्यंत महत्वपूर्ण एवं महत्वकांक्षी योजना पर चर्चा की। उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य की विषम भौगोलिक परिस्थितियों के दृष्टिगत सुझाव दिया कि पर्वतीय क्षेत्रों में विषम भौगोलिक परिस्थिति तथा बिखरी आबादी के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की लागत अत्यधिक आती है। फलतः परियोजना की संपूर्ण लागत का 5 प्रतिशत सामुदायिक अंशदान एकत्रित कर पाना व्यवहारिक रूप से अत्यधिक कठिन है। इसका प्रभाव योजना की प्रगति पर पड़ना स्वाभाविक है। इस दृष्टि से पर्वतीय एवं विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों के संदर्भ में 5 प्रतिशत सामुदायिक अंशदान की शर्त को समाप्त किए जाने पर विचार किये जाने का अनुरोध किया। केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री गजेन्द्र शेखावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के अनुरोध पर समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि पर्वतीय एवं विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों के संदर्भ में ग्रामीण आबादी के अंदर बिछाए जाने वाले समग्र पाइपलाइन वितरण प्रणाली पर आने वाले व्यय को ही इन विलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर की लागत के आगणन हेतु सम्मिलित किया जाए और इसी के सापेक्ष 5 प्रतिशत सामुदायिक अंशदान का निर्धारण किए जाने की व्यवस्था लागू की जाए। इसके अतिरिक्त अन्य समस्त व्ययों को को सामुदायिक अंशदान हेतु गणना के निमित्त इन विलेज इन्फ्रास्ट्रक्चर का अंश न मानकर इन पर होने वाला व्यय केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के द्वारा पूर्व नियत अंश विभाजन के तहत परियोजना मद से किया जाए।
केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेन्द्र शेखावत ने मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र द्वारा दिये गये सुझावों पर समुचित कार्यवाही का आश्वासन दिया।
फिर इसके बाद मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र एवं केन्द्रीय मंत्री जावडेकर के मध्य उत्तराखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-1 के अन्तर्गत 1153.591 कि0मी0 के 140 वनभूमि प्रभावित कार्य के विषय में चर्चा की । मुख्यमंत्री ने केन्द्रीय मंत्री से उक्त कार्यों की वन भूमि प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया मार्च 2020 तक पूर्ण करने के लिए अनुरोध किया। इसके साथ ही वन एवं पर्यावरण से संबंधित राज्य से जुडे विभिन्न विषयों पर भी चर्चा की।


फिर इसके बाद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने नई दिल्ली में केन्द्रीय संचार, इलेक्ट्रानिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद से भेंट कर भारत नेट फेस-2 परियोजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य के प्रस्ताव व राज्य के स्टेट डाटा सेंटर के लिए अनुदान राशि की स्वीकृति दिए जाने का अनुरोध किया।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि दूरसंचार मंत्रालय भारत सरकार द्वारा भारत-नेट फेज-2 के अन्तर्गत प्रत्येक ग्राम पंचायत तक ऑप्टिकल फाईबर के माध्यम से कनेक्टिविटी प्रदान की जानी थी। यह योजना पूर्व में माह दिसम्बर, 2018 तक पूर्ण होनी थी, जिसे तदोपरान्त मार्च, 2019 तक पूर्ण किये जाने का लक्ष्य रखा गया था। परियोजना पर कार्य आरम्भ न हो पाने के कारण यू.एस.ओ.एफ. (यूनिवर्सल सर्विसीस ओब्लिगेशन फण्ड) के स्तर से परियोजना को लोक निजी सहभागिता मॉडल पर क्रियान्वित किये जाने के निर्देश प्राप्त हुये थे। इसके अन्तर्गत भारत सरकार के सार्वजनिक उपक्रम पी.जी.सी.आई.एल. द्वारा लगभग रूपये 2700 करोड़ का प्रस्ताव दिया गया। पुनः यूएसओएफ द्वारा राज्य से आग्रह किया गया कि परियोजना का प्रस्ताव स्टेट लेड मॉडल के आधार पर प्रस्तुत किया जाये। इस आग्रह के उपरान्त राज्य सरकार द्वारा रूपये 1914 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है। उल्लेखनीय है कि इस प्रस्ताव में परियोजना लागत पी.जी.सी.आई.एल. द्वारा दिये गये प्रस्ताव से काफी कम है।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए पहाड़ी क्षेत्र के दूर दराज इलाकों में कनेक्टिविटी प्रदान किया जाना नागरिकों के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है और सरकार के लिये यह शीर्ष प्राथमिकता का विषय है। राज्य के क्षेत्र जो कि अन्तर्राष्ट्रीय सीमा से सटे हैं व सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील हैं, वहां भी कनेक्टिविटी पहुंचाना महत्वपूर्ण हैं। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से अनुरोध किया कि  भारत नेट फेस-2 परियोजना के अन्तर्गत उत्तराखण्ड राज्य के प्रस्ताव पर अनुमोदन देते हुए परियोजना के वित्त पोषण हेतु राज्य को धनराशि प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध करवाई जाए।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ने नवीनतम तकनीकी हाईपर कन्वर्जड इन्फरास्ट्रक्चर पर आधारित प्रथम स्टेट डाटा सेंटर स्थापित कर क्रियाशील कर दिया है। साथ ही साथ राज्य ने नवीन नवाचार के अन्तर्गत ड्रोन एप्लिकेशन रिर्सच सेन्टर की स्थापना कर इस क्षेत्र में मानव संसाधन विकास हेतु प्रशिक्षण कार्यक्रम आरम्भ कर दिये हैं। सॉफ्टवेयर टेक्नोलोजी पार्क्स ऑफ इण्डिया के अन्तर्गत स्टार्टअप हब की स्थापना के लिए राज्य सरकार की ओर से 29एकड़ भूमि उपलब्ध करा दी गयी है। इस संदर्भ में राज्य की सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी एवं एसटीपीएल के मध्य एमओयू हस्ताक्षरित किया जा चुका है। इसके अन्तर्गत ड्रोन सम्बन्धित सेन्टर ऑफ एक्सिलैन्स एवं साईबर सिक्योरिटी अकादमी की स्थापना प्रस्तावित है, जिस हेतु लगभग रूपये 10 करोड़ की आवश्यकता होगी।
राज्य का स्टेट डाटा सेन्टर अन्य राज्यो की तुलना में बहुत ही कम लागत (रूपये 4.85 करोड़) से बनाया गया है। तथा इसमें 14 विभागों के एप्लीकेशन होस्ट किये गये हैं। राज्य के समस्त विभागों के एप्लीकेशन को होस्ट किये जाने तथा इसके एक ग्रीन डाटा सेन्टर बनाने की योजना है। इन कार्यो पर अनुमानिम व्यय रूपये 20 करोड़ है, जिसे अनुदान के रूप में राज्य को दिये जाने का आग्रह किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एनईजीडी द्वारा इण्डिया इण्टरप्राईज आर्कीटेक्चर योजना पायलट के रूप में कुछ राज्यों जैसे मेघालय व पंजाब आदि में संचालित हो रही है। इस तर्ज पर उत्तराखण्ड राज्य के चुनिन्दा विभाग- शिक्षा, स्वास्थ्य अथवा कृषि विभाग को पायलट के रूप में सम्मिलित किये जाने का अनुरोध है। इससे उत्तराखण्ड राज्य में बेहतर गवर्नेन्स उपलब्ध कराये जाने हेतु एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी।
फिर ख़बर लिखे जाने तक मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से भेंट कर उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को पूर्वोत्तर राज्यों की भांति विशेष पैकेज देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसके लिए बजट आवंटन में निर्धनता अनुपात के साथ ही पलायन की समस्या को भी आधार के रूप में लिया जाए।


मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा दीनदयाल अन्त्योदय योजना राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अन्तर्गत योजना के प्रारम्भ से वर्तमान तक 13 जनपदों के 95 विकासखण्डों में कार्य किया जा रहा है। अपने उद्देश्य की पूर्ति हेतु यूएसआरएलएम द्वारा स्वयं सहायता समूहों तथा उनके उच्च स्तरीय संगठनों का गठन कर लिया गया है। 16422 समूहों की सूक्ष्म ऋण योजना तैयार करते हुये उन्हें आजीविका गतिविधियों से जोड़ने के लिए समूहों को सीआईएफ एवं बैंक लिकेंज कर ऋण उपलब्ध कराया गया है। सूक्ष्म ऋण योजना के आधार पर राज्य में गठित समूहों द्वारा 65 प्रकार की आजीविका सम्वर्धन गतिविधियों का चयन किया गया है। समूहों की क्षमता विकास करते हुए उन्हे सतत् आजीविका के साधन उपलब्ध कराये जाने हैं, जिसके लिए इन समूहों को निरन्तर प्रशिक्षण की आवश्यकता है। समूहों को वर्तमान में उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन स्तर पर प्रशिक्षण प्रदान करवाया जा रहा है किन्तु वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण सभी समूहों को आजीविका सम्बन्धित गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जाना सम्भव नही हो पा रहा है। साथ ही महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा उत्पादित वस्तुओं के विपणन हेतु नेनौ पेकेजिंग यूनिट स्थापना, पैकेजिंग सामग्री, सरस विपणन केन्द्र में बुनियादी सुविधाओं का विकास, ग्रोथ सेन्टर में बुनियादी सुविधाओं का विकास, उत्पादों की डिजाइनिंग, ब्राण्ड डेवलेपमेण्ट एवं उत्पादों के प्रचार प्रसार, उत्पाद बिक्री तथा मार्केट लिंकेज हेतु स्थानीय स्तर पर मेलों का आयोजन, क्रेता-विक्रेता सम्मेलन की प्रदान करने एवं सामुदायिक कैडर तथा कार्यरत मानव संसाधन सहित विभिन्न क्रियाकलापो के संचालन हेतु अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मिशन के सफल संचालन हेतु सभी 95 विकास खण्डों में विभिन्न पदों पर कुल 407 पद सृजित किये गये हैं जिसके सापेक्ष सभी पदों पर तैनाती नियमानुसार कर दी गई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन में सृजित 407 पदों के सापेक्ष मानदेय भुगतान हेतु प्रतिवर्ष लगभग 11 करोड़ रूपये की आवश्यकता होगी जिसकी देयता प्रति माह अनिवार्य रूप से होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डे-एनआरएलएम (दीनदयाल अन्त्योदय योजना- राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष 2019-20 में उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के द्वारा मिशन के विभिन्न घटकों में रूपये 9572.56 लाख की सैद्धान्तिक स्वीकृति प्रदान करते हुए रूपये 4095.52 लाख की अवमुक्ति करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। जबकि कम्यूनिटी फंड, प्रशिक्षण, मार्केटिंग, मानव संसाधन आदि गतिविधियों में 6601 लाख रूपए की आवश्यकता होगी। इस प्रकार राज्य को प्रतिवर्ष कुल 10696.72 लाख धनराशि की आवश्यकता होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्वतीय व सीमांत जनपदों में स्थानीय स्तर पर आजीविका क्रियाकलापों को सुदृढ़ किया जाना जरूरी है। इसके लिए निर्धनता अनुपात के साथ-साथ पलायन व अति संवेदनशील सीमांत जनपदों व दैवीय आपदा से प्रभावित क्षेत्रों में आजीविका के माध्यम से पलायन रोकने के दृष्टिगत उत्तराखण्ड राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन को पूर्वोत्तर राज्यों की भांति विशेष पैकेज दिया जाए।
मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र द्वारा पीएमजीएसवाई-फेज-1 के अन्तर्गत भारत सरकार द्वारा अनुमोदित कोर नेटवर्क में प्रस्तावित मार्गो में से स्वीकृत, निर्मित अथवा निर्माणाधीन 299.98 करोड़ लागत के 139 सेतुओं के निर्माण के लिए कार्यवाही का अनुरोध किया गया, जिस पर केन्द्रीय मंत्री तोमर ने सकारात्मक रूख रखते हुए प्रकरण का परीक्षण कराने हेतु सम्बन्धित अधिकारियों को निर्देश दिए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री द्वारा पीएमजीएसवाई-1, स्टेज-2 के अन्तर्गत 529.42 करोड़़ लागत के 121 मार्गों (लम्बाई 1051.29 कि0मी0) के पक्कीकरण के लम्बित प्रकरण पर अग्रिम कार्यवाही का भी अनुरोध किया।
तो देखा आपने कह सकते है ना आप भी की आज तो दिल्ली मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र की गाड़ी दिल्ली के मुख्यमंत्री से तेज़ चली होगी
ओर 4 से 5 गेयर पर दबाकर।
सुखद है जब मुलाकात होगी, बात होगी, तो हल भी निकलेगा।
जरूरी नही की जो हमने मागा वही पूरा मिले पर जो भी मिले सन्तुष्ट करने लायक मिले ये उम्मीद करते है।
बाकी डबल इंजन की सरकार है जितना मागा है उससे अधिक देना होगा ।
केंद्र सरकार को वरना फिर 2022 मैं चुनाव के दौरान क्या रहेगा बोलने के लिए


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