दो साल के लिए क्या मंत्री बनना! , प्रदेश अध्यक्ष बनाते है तो ….. कल 12 बजे तक नाम का एलान

ख़बर बड़ी है
बता दे कि कालाढुंगी विधायक बंशीधर भगत ने सीधे शब्दों मैं मंत्री पद लेने से इनकार कर दिया है, और ऐसे मैं उन्होंने कहा कि केंद्र और उत्तराखंड का भाजपा नेतृत्व उन्हें प्रदेश अध्यक्ष बनाते है तो निश्चित तौर पर पार्टी को मजबूती प्रदान करने की कोशिश करेंगे और साथ 2022 मैं भाजपा उत्तराखंड मैं दोबारा सरकार बनाएगी ये उनकी पूरी कोशिश होंगी पर सिर्फ दो साल के लिए मंत्री क्या बनना ये भी उन्होंने अपने बयान मैं कह दिया


जिसके राजनीतिक गलियारों मैं अलग अलग मायने निकाले जा रहे है कि
क्या अब जो महज दो साल के लिए मंत्री बनने जा रहा है। उसकी कोई कदर नही होने वाली!! या फिर जो अब मंत्री बनेगा वो सिर्फ मनीप्लांट का पौधा होगा या सिर्फ डमी!!
बात कुछ भी हो पर अनुभव के माहिर
बंशीधर भगत की बात से ये साफ है कि वे प्रदेश अध्यक्ष भाजपा के बनने वाले है!! अगर आज रात तक भाजपा हाईकमान का मन बदल गया तो फिर बात अलग !
बता दे कि आज की रात के बाद कल उत्तराखंड मैं भाजपा का नया प्रदेश अध्यक्ष बनने जा रहा है
विधायक बंशीधर भगत ने मंत्री पद के लिए साफ इंकार कर दिया है और साथ ही बताया कि भाजपा नेतृत्व उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के लिए मौका देगी तो संगठन को मजबूती देने के लिए हर संभव प्रयासरत रहेंगे।
बंशीधर भगत 6 बार विधायक बन चुके है। विधायक बंशीधर भगत मानते है कि उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेई से प्रेरित होकर राजनीति में कदम रखा। वर्ष 1975 में जनसंघ पार्टी से जुड़े। इसके बाद उन्होंने किसान संघर्ष समिति बनाकर राजनीति में प्रवेश किया। राम जन्म भूमि आंदोलन में वह 23 दिन अल्मोड़ा जेल में रहे। वर्ष 1989 में उन्होंने नैनीताल-ऊधमसिंह नगर के जिला अध्यक्ष का पद संभाला। वर्ष 1991 में वह पहली बार उत्तर प्रदेश विधानसभा में नैनीताल से विधायक बने। फिर 1993 व 1996 में तीसरी बार नैनीताल के विधायक बने। इस दौरान उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार में खाद्य एंव रसद राज्यमंत्री, पर्वतीय विकास मंत्री, वन राज्य मंत्री का कार्यभार संभाला। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद वह उत्तराखंड के कैबिनेट मंत्री रहे। वर्ष 2007 में हल्द्वानी विधानसभा वह चौथी बार विधायक बने। उत्तराखंड सरकार में उन्हें वन और परिवहन मंत्री बनाया गया। इसके बाद 2012 में नवसर्जित कालाढूंगी विधानसभा से उन्होंने फिर विजय प्राप्त की। फिर वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में छठीं जीत दर्ज की।  बहराल अब देखना होगा कि कल की दोपहर लगभग 12 बजे क्या फैसला उत्तराखंड भाजपा के हित के लिए निकलकर आता है क्योंकि
प्रदेश अध्यक्ष जो भी बने
उसके आगे उत्तराखंड मैं भाजपा के वोट बैंक को बरकरार रखने की,
ओर फिर से सत्ता मैं वापसी की चुनोती होगी
वो भी उस समय जब मोदी के नाम पर नही सरकार के काम
ओर सगठन के मजबूत पकड़ पर वोट पड़ेंगे।
ओर उत्तराखंड मैं 2022 के विधान सभा चुनाव मैं भाजपा अपने लगभग 20 से 25 सिटिंग विधायक के टिकट काटेगी तब ही उत्तराखंड मैं फिर से भाजपा सरकार बना सकती है!! ये भी सूत्र बोलते है !!
हालांकि अभी समय पूरे दो साल का है और राजनीति मे कब क्या हो जाये ये कोई नही जानता।

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