कभी विजयरथ पर सवार एक के बाद एक राज्यों को अपने कब्जे में करने वाली भारतीय जनता पार्टी अब धीरे-धीरे राज्यों की सत्ता से बाहर होती जा रही है जानते है क्यो??
जी हा बीते लगभग एक साल में पार्टी ने महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान और झारखंड में सत्ता खो दी है।
भले ही इस बीच कर्नाटक में ओर हरियाणा मैं जैसे तैसे बीजेपी ने भले ही सरकार बना ली हो, लेकिन बड़े कैनवस पर देखा जाए तो बीजेपी के लिए बीते एक साल कुछ अच्छे नहीं रहे। चुनाव नतीजों का विश्लेषण करने के बाद हमको जीत-हार के कुछ कारण सामने आते हैं उनमें
भारतीय जनता पार्टी को अपनों की नाराजगी भी काफी भारी पड़ी है।
आपको बता दे कि लोकसभा चुनाव में हरियाणा की सभी 10 सीटों पर भाजपा की जीत को लेकर जननायक जनता पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह ने कहा था कि वह एक बड़ा तूफान आया था, जिसमें सारी पार्टियां बह गईं। इसका कारण सीधे तौर पर कांग्रेस का कमजोर होना है। इसलिए लोकतंत्र में विपक्ष का मजबूत होना भी बेहद जरूरी है, परंतु कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी के सामने राहुल गांधी को पेश किया तो लोगों ने उन्हें स्वीकार ही नहीं किया।
अब आगामी समय मैं होने वाले विधानसभा चुनाव में परिस्थितियां एकदम अलग हैं। अब मोदी के नाम से वोट नहीं मिलने वाले है।
बल्कि स्थानीय व प्रदेश के मुद्दे पर ही चुनाव होना है। अब जहा जहा भाजपा की सरकारे है वहां वहां के मुख्यमंत्री के काम काज , पर बहुत कुछ निभर्र होने वाला है विधानसभा के चुनाव।

मुख्यमंत्री के चेहरे पर है राज्य की जनता के अब वोट।
आगमी विधानसभा के चुनाव मैं मौजूदा समस्याओं,
भाजपा के शासनकाल व किसान, रोजगार, मजदूर व कर्मचारियों को लेकर मुद्दों पर
अब वोट डालने जनता घरों से बाहर निकलेगी
अब झारखंड विधानसभा चुनाव परिणामों के रुझान को देखते हुए राज्य की सत्ता से भाजपा की विदाई तय हो गई है क्या ये मान लिया जाए अरे भाई दो साल के अंदर हुए चुनावों में यह सातवां राज्य है जहा से एनडीए ने सत्ता गवां दी है।
बता दे कि दिसंबर 2017 में देश के लगभग 72% आबादी और 75% भूभाग वाले 19 राज्यों में एनडीए या भाजपा की सरकार थी। झारखंड में हार के बाद अब एनडीए की सरकार देश के 42 फीसदी आबादी पर ही बची हुयी है ।


अभी वर्तमान में 16 राज्यों में ही एनडीए सत्ता पर काबिज है। बिहार में नीतीश कुमार महागठबंधन छोड़ भाजपा के साथ आ गए जहां 2020 में चुनाव होना है।
वही बता दें कि इससे पहले मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में भी भाजपा की ही सरकार थी। लेकिन यहां भाजपा के हाथों से सत्ता छीन ली गई है


मार्च 2018 से पहले आंध्र प्रदेश में भी भाजपा-टीडीपी गठबंधन की सरकार थी। लेकिन, स्पेशल स्टेटस को लेकर हुए विवाद के बाद भाजपा से गठबंधन तोड़ लिया। इसके बाद 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में यहां वाईएसआर कांग्रेस ने सरकार बनाई और जगनमोहन रेड्डी मुख्यमंत्री बनें।

महाराष्ट्र में भी हाल में ही हुए विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर हुए विवाद के कारण भाजपा-शिवसेना गठबंधन टूट गया। इसके बाद शिवसेना ने एनडीए का साथ छोड़ा और कांग्रेस-एनसीपी के साथ मिलकर सरकार बना ली।

जम्मू-कश्मीर में भी पीडीपी के साथ मिलकर सरकार बनाने वाली भाजपा ने जून 2018 में गठबंधन से नाता तोड़ लिया था। जिसके बाद राज्य में पहले राज्यपाल शासन और बाद में राष्ट्रपति शासन लगाया गया। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाट दिया गया है। इनमें से जम्मू-कश्मीर में विधानसभा है जहां चुनाव होना बाकी है। लद्दाख में विधानसभा नहीं है।
ये भी जान ले कि वही भाजपा ने भले ही इन सात राज्यों में सरकार गवां दी लेकिन इस दौरान उसने कर्नाटक, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय में सरकार बनाई भी है। जिससे उसके हार का अंतर कुछ कम हुआ है।

बहरहाल अब हमारे सूत्र बता रहे हैं कि कि भारतीय जनता पार्टी का हाईकमान बदलाव से भी नहीं पीछे हटेगा।
ओर अब भारतीय जनता पार्टी उत्तराखंड, यूपी, गुजरात, हिमाचल ,और त्रिपुरा में नेतृत्व को लेकर गंभीर हो गई है।


और सूत्र बता रहे हैं कि इनमें से जरूरी बदलाव पर विचार भी हो रहा है पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेता इस बात के संकेत भी दे रहे हैं की इन नेताओं को चुनाव तक कमान देने के परिणाम आगे सही नहीं आने वाले इसके साथ ही भाजपा शासित राज्यों की सरकारों के कामकाज की समीक्षा संगठन और विधायकों की राय महत्वपूर्ण अब रहने वाली है


पीएम मोदी को को देश को जनता पसंद करती है इस बात से इनकार नही किया जा सकता
लेकिन मोदी मैजिक मैं जीत कर संसद पहुँचने वाले, या विधायक बनने वाले, ओर फिर अमित शाह ओर मोदी के आशीष से मुख्यमंत्री बनने वाले चेहरो को अब ये समझ लेना चाइए कि उनको काम करके देना होगा
जनता की नज़र मैं लोकप्रियता उनकी लगातार बनी रहे ,
कुनबे के लोगो को साथ लेकर चलना होगा।
अहंकार जैसे शब्द से दूर रहना होगा
ओर सबसे बड़ी बात जो वादे 2017 मैं किये थे उन परमंथन करना होगा कि आखिर लगभग 3 साल मैं क्या हुवा ओर क्या नही।
केंद्र सरकार की योजनाओं का बखान छोड़ खुद ये सोचना होगा कि हमने खुद तीन साल मैं क्या किया।
ओर इसी लाइन पर स्याद अब भाजपा का हाईकमान काम करेगा कि जहा जहा राज्य मैं उनकी सरकार है वहा उनके मुख्यमंत्री उनकी सरकार के काम काज की ताबड़तोड़ समीक्षा तो होगी ही
साथ ही ये भी तय हो जाएगा कि मिशन 2022 के लिए क्या वर्तमान चेहरा पर विस्वाश किया जा सकता है या नही।
या फिर अब बदलाव से ही हल निकलेगा


स्याद कुछ यही सोचा होगा भाजपा हाईकमान ने अटल जी की जयंती पर कि आखिर हम क्यो राज्यो से सत्ता गवा रहे है।
आखिर कमी कहा पर हो रही है।
मंथन चला होगा।


क्योकि अभी तक जो हुवा वो भाजपा के लिए नसीहत है।
समझ गए तो ठीक वरना 2022 तक कही देर ना हो जाये।
उन राज्यों मैं जहा भाजपा की सरकार है और 22 मैं चुनाव होने है।


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