तो क्या सिर्फ अस्पताल ही नही पूरे मिशन की छवि को धूमिल करने का षडयंत्र जारी है !!

अब अस्पताल ये ना करे तो क्या करे जब बिना प्रशासन की अनुमति के धरना देने पहुंचे तो अस्पताल ने पुलिस में दी तहरीर
मामला महंत इन्दिरेश अस्पताल का है जिसे कुछ तथाकथित लोगो ने षड्यंत्र के तहत बदनाम करने की कसम जो खा रखी है
समझ लिया है उगाई का या कमाई का अड्डा पर यहा कहा इस मामले पर दाल किसी की गलने वाली है ? तभी तो आये दिन कुछ लोग पर्दे के पीछे रहकर गुरु राम राय मिशन ,ट्रस्ट, के खिलाफ षड्यंत्र करते रहते है । ओर सीधे साधे लोगो को अपने जाल मे फसा कर
अस्पताल के ख़िलाफ़ आये दिन किसी ना किसी बात को मुदा बनाकर सोशल मीडिया मैं उछालने का काम करते है । अपनी राजनीतिक रोटियां सेकना कहे या खुद के आर्थिक लाभ के लिए षडयंत्र करते दिखाई देते है।ओर अपनी नापाक हरकत से बाज़ नही आते इसे अस्पताल प्रबधन भी समझता है पर जब हद हो जाती है तो अस्पताल प्रबन्धन को फिर नियम अनुसार , खुद की रक्षा के लिए, अपने स्टाफ़ की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम भी उठाने पड़ते है।

इस बात पर आगे बात करेंगे पर ताजा मामला ये है कि
अस्पताल प्रबधन ने क्यो दी और किस लिए पुलिस अधीक्षक व कोतवाली मैं तहरीर?
क्यो अस्पताल प्रबन्धन ने आरोप लगाया कि कुछ लोग ब्लैकमेल कर पैसा वसूलने की कोशिश में ऐसा कर रहे हैं ?
एक सवाल ये उठता है कि सर क्या सिर्फ इतना ही हो रहा है या इससे भी अधिक क्योंकि यहा टारगेट षड़यंत्र करने वालो की नज़र में सिर्फ अस्पताल ही है या पूरा गुरु राम राय मिशन , गुरु राम राय ट्रस्ट ??
उड़ते उड़ते ख़बर तो यही है कि जितना आप अस्पताल को बदनाम करोगे, जितना आप शोर मचाओगे उतना ही हम आपकी इच्छाओं को परिपूर्ण करेगे। ओर हम नही करेगे तो कोई और करेगा पर आप लगे रहो!!!
जी हां उत्तराखंड के ही नही पूरे उत्तर भारत के लोकप्रिय श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल को बदनाम करने के लिए कुछ ना कुछ षड्यंत्र करने पर कुछ लोग पर्दे के पीछे से लगे हुए।


( उनके निशाने पर ग्राउंड जीरो है मतलब अस्पताल से लेकर अस्पताल के आस पास का क्षेत्र ओर किसी ना किसी तरह लोकप्रिय श्री महाराज जी की छवि को धूमिल करने का टारगेट)
जिसके लिए वे खुद आगे ना आकर ओर लोगो को मोहरा बना रहे है। ओर काफी समय से समय समय पर कभी किसी सगठन को किसी बेनर को, कुछ राजनीतिक लोगो को, कुछ सामाजिक सगठनों को
आगे खड़ा कर देते है गलत तथ्य को आधार बनाकर।
चलिए इस पर भी आगे बात करेगे।
फिलहाल कल की ख़बर है कि अस्पताल मै कुछ लोगों ने शुक्रवार को अस्पताल के मुख्य भवन में बिना प्रशासन की अनुमति के धरना दिया। इन लोगों ने अस्पताल इमरजेंसी सेवाओं को बाधित किया। इससे अस्पताल में आने वाले मरीजों व उनके परिजनों को भारी असुविधा हुई। अस्पताल जैसी अति सवेंदनशील जगह पर बिना प्रशासन की अनुमति के धरना प्रदर्शन करना गैरकानूनी है। अस्पताल प्रबन्धन ने सम्बन्धित मामले की तहरीर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून व कोतवाली पटेल नगर में देकर नामजद लोगों के लिए मुकदमा दर्ज कराने की मांग की है। पटेल नगर पुलिस मामले की जाॅच कर रही है। कुछ लोगों ने राजनीति चमकाने के लिए, फोटो खिंचवाने व ऐसे फाटोग्राफस को फेसबुक पर वाहवाही लूटने के लिए अस्पतालों तक को नहीं छोड़ा है। ऐसा ही एक वाक्य कल श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के मुख्य भवन में भी देखने को मिला। इस मामले में भी घण्टे दो घण्टे फोटो सैशन व अफरातफरी कर वे लोग अस्पताल से रवाना हो गए।
ख़बर है कि शुक्रवार सुबह 10ः30 बजे अस्पताल परिसर में दौलत कुंवर, आरिफ, सतीश कुंवर, श्याम सिंह भारती, संजय कुवर व अन्य अस्पताल के मुख्य परिसर में बिना प्रशासनिक अनुमति के धरना देने के लिए इकट्ठा हो गए। जब अस्पताल प्रबन्धन व थाना पटेल नगर पुलिस अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थल पर बिना प्रशासनिक अनुमति के धरना देने की बात कही तो यह जबरन अस्पताल परिसर के मुख्य भवन के सामने धरना प्रदर्शन करने लगे। अस्पताल प्रबन्धन के अनुसार भीड़ में शामिल यह लोग पूर्व में एक नवजात शिशु की हुई मौत के मामले में अस्पताल प्रबन्धन पर दबाव बनाकर पैसा वसूलना चाहते हैं। यह लोग शिशु रोग विभाग के डाॅक्टर पीयूष से मारपीट करने व उन्हें नुकसान पहुंचाने आए थे। उन्होंने बाकायदा अपने बैनर पर डाॅ पीयूष का नाम लिखकर उन्हें अपराधी साबित किया हुआ था। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि बिना किसी जाॅच रिपोर्ट के हमारे डाॅक्टर के नाम का गलत इस्तेमाल किया गया है। हम मानहानी का अलग से मुकदमा दर्ज करवाएंगे। इस घटना से अस्पताल के शिशु रोग विभाग के डाॅक्टर पीयूष को जान का खतरा है व डाॅ पीयूष बेहद डरे सहमे हैं। डाॅक्टर पीयूष के साथ कोई अप्रिय घटना न हो इसके लिए डाॅ पीयूष नेे पुलिस सुरक्षा की माॅग की है।
डाॅ विनय राय जो चिकित्सा अधीक्षक है श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के उनका कहना था कि
श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल में श्रीमती निर्मला व नवजात बच्ची का उपचार नियमानुसार किया गया। यदि अभी भी परिजनो को इलाज से सम्बन्धित कोई शंका या शिकायत है तो वे सीएमओ देहरादून द्वारा बनाए गए डाॅक्टरों के पैनल के समक्ष अपनी शिकायत रख सकते हैं। परिजनों का कहना है कि उनके मामले की जाॅच अभी चल रही है। उसके बावजूद कुछ लोगों ने बिना प्रशासन की अनुमति के अस्पताल में धरना प्रदर्शन किया, यह गैरकानूनी है। हमने पुलिस प्रशासन से सम्बन्धित लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। ये सब कहना डाॅ विनय राय का है जो चिकित्सा अधीक्षक है श्री महंत इन्दिरेश अस्पताल के ।
पहले इस पूरे मामले पर ही बात करते है और जिन लोगो की जो माग है उनके मांग पत्र को जरा आप भी पढ़िए।


इस पत्र में मागे है कि मासुम गुड़िया के कातिल डॉक्टर पीयूष की तुरंत गिरफ्तारी हो।
अब सवाल ये उठता है कि जिस विषय पर डॉक्टर की गिफ्तारी की मांग कर रहे है इस पूरे मामले पर पीड़ित परिवार का कहना है कि अभी जांच चल रही है फिर क्या कोई किसी भी डॉक्टर को कातिल कह सकता है ? बोल सकता है? आरोप लगाने वाले ने आरोप लगा दिया पर जिस पर आरोप बिना जांच ,बिना तथ्य के लगा दिया उसकी मानासिक स्थत्ति क्या होगी ? या क्या हो रखी होगी ? ओर क्या कहता है कानून, नियम कि क्या आप बिना दोष सिद्ध हुए किसी को कातिल कह सकते है ये सवाल बड़ा है ??

मांग पत्र में दूसरा बिंदु यह था कि जब से भारत सरकार द्वारा अटल आयुष्मान योजना द्वारा निशुल्क इलाज की योजना चलाई गई तब से लेकर आज तक कितने गरीबों को इस योजना के तहत इलाज़ हुवा उसकी सूची जारी करे।
और तीसरा सवाल था कि हॉस्पिटल को संचालित करने के लिए या कह सकते योजना को संचालित करने के लिए भारत सरकार या राज्य सरकार ने कितने पैसे दिए उसकी सूची या जानकारी मिले।
अब ये सवाल किससे पूछे जाने थे या जवाब किससे मागा जाना चाहिए था उस विषय को छोड़ कर हम आज तक कि इन्ही सवालों के जवाब की अपडेट जानकारी अपने दर्शकों को देते है।

अपडेट जानकारी आपको बता दे कि अब अटल आयुष्मान योजना में सूचीबद्ध निजी अस्पताल आपके मरीजों का मेडिकल टेस्ट करने से इनकार नहीं कर सकते हैं। वही टेस्ट की सुविधा उपलब्ध न होने पर भी उन अस्पताल की जिम्मेदारी है कि वह मरीज के टेस्ट का प्रबंध खुद करे ये भी बता दे कि इसके लिए अस्पतालों को मेडिकल टेस्ट आउटसोर्स से कराने का अधिकार भी दे दिया गया है।ओर योजना में गोल्डन कार्डधारक मरीज से मेडिकल जांच कराने का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस संबंध में सभी सूचीबद्ध अस्पतालों को निर्देश अब दिए गए हैं जैसा को आप जानते है कि आयुष्मान योजना के अंतर्गत गोल्डन कार्डधारक मरीज को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज कराने की सुविधा है। ओर योजना का लाभ कार्डधारकों को देने के लिए त्रिवेंद्र सरकार ने लगभग पूरे 180 अस्पतालों के साथ इस पर अनुबंध किया हुवा है
और अपने उत्तराखंड में अटल आयुष्मान योजना के अंतर्गत त्रिवेंद्र सरकार ने 1 साल में 32 लाख 87 हजार लोगों के गोल्डन कार्ड बनाए हैं इसमें से 75 हज़ार 278 मरीजों का विभिन्न विभिन्न सूचीबद्ध अस्पतालों में मुफ्त इलाज कराया गया है जिस पर त्रिवेंद्र सरकार ने 72 .17 करोड़ की राशि खर्च की है और उत्तराखंड राज्य से बाहर के निजी अस्पतालों में 430 मरीजों का इलाज किया गया और इस पर लगभग एक करोड़ की राशि खर्च की गई जानकारी अनुसार खबर है कि योजना में सूचीबद्ध निजी अस्पतालों को त्रिवेंद्र सरकार की तरफ से आदेश है है कि निजी अस्पताल मरीजों का इलाज करने में आनाकानी न करें जिसका पालन सभी निजी अस्पताल कर भी रहे हैं और लगभग सरकार की तरफ से जानकारी अनुसार 1 दिन में लगभग 30 लाख के क्लेम का भुगतान भी हो रहा है।
ये है अपडेट जानकारी।
ये सब ना होने पर किसी भी निज़ी अस्पताल के खिलाफ मरीज के परिजन सरकार से गुहार लगा सकते है या शिकायत कर सकते है।
बहरहाल मुद्दा यहा पर ये था कि 28 सितंबर को परिजन गर्भवती निर्मला पत्नी केसर सिंह को अस्पताल लाए थे और 29 सितंबर को निर्मला जी ने एक बच्ची को जन्म दिया आरोप ये लगा कि डॉक्टर की लापरवाही केसर सिंह जी की बच्ची की मौत हो गई इसके बाद डॉक्टर पीयूष को कातिल बताते हुए उनकी गिरफ्तारी की मांग की गई और महज 2 घंटे का धरना दिया गया जबकि अस्पताल के जनसंपर्क अधिकारी भूपेंद्र रतूड़ी ने मीडिया को बताया कि मंच के नाम पर बिना प्रशासन की अनुमति के धरना देने वाले लोग इमरजेंसी सेवाओं को बाधित कर रहे थे और यह लोग अस्पताल प्रबंधन से पैसा ऐठना चाह रहे है।
ओर इस पूरे प्रकरण पर सीएमओ स्तर से जांच की जा रही है ।
इधर दुःखद है जिनकी मासूम बीटिया आते ही दुनिया से अलविदा कह गई उस परिवार का दर्द उनसे बेहतर कोंन समझ सकता है ख़ास कर उस माँ का जिसने 9 महीने तक तपस्या की।
ओर आज भी उस माँ का इलाज अस्प्ताल मैं जारी है यदि उनकी तरफ से भी कोई बात बोली जाएगी तो उसको भी छापा जाएगा ।
ओर पूरी बात पूरा मामला जांच का विषय है।
जांच की रिपोर्ट के बाद ही आप या हम कुछ कह पाएंगे।
लेकिन इन सब से हटकर बात ये है कि पिछले एक साल के अंदर महंत अस्पताल को ,उसकी छवि को भी लगातार खराब करने का षड्यंत्र जारी है, ओर जब भी अस्पताल मे इस प्रकार के मामले होते है जब डॉक्टर या अस्पताल का स्टाफ उन मरीजो के परिजनों को समझता है बताता है, उनके साथ
उनके मरीज की बीमारी या तकलीफ से उन्हें ठीक से अवगत कराता है तो कुछ षडयंत्र कारी लोगो को भनक मिलते ही उनको भड़काने का काम किया जाता है क्योंकि उनके सूत्र उन्हें तत्काल जानकारी दे देते है
बस फिर लोग उनको अस्पताल के खिलाफ भड़का कर
अपने स्वार्थ निकालने की फितरत मैं रहने वाले दे दना दन सोशल मीडिया पर सब वायरल भी कर देते है। ओर जो मन मैं आये गुरु राम राय ट्र्स्ट , मिशन , व लोकप्रिय महाराज जी छबि तक ख़राब करने के लिए कुछ भी लिख देते है ताकि छवि ख़राब हो । ओर यदि इनको डर होगा तो इसके बदले नोट भी कमा लेगे!
पर जब सच्चाई या सच परिजनों को पता चलता है या किसी ओर लोगो को तो तब तक
देर हो जाती है और अस्पताल और स्टाफ की सोशल मीडिया मे छवि खराब ।
करने को कौशिक की जाती है ।
कुल मिलाकर जितनी जानकारी बोलता उत्तराखंड को है वो ये है कि
गुरु राम राय एजुकेशन मिशन, गुरु राम राय दरबार साहिब, स्वास्थ , शिक्षा , खेल खिलाड़ियों को बढ़वा, जैविक खेती, समाज सेवा,
पर्यावरण, पहाड़ मैं बढ़ते पलायन जैसे महत्वपूर्ण कही मुद्दों पर काम कर रहा है।
ओर इन सबके बीच इन्ही अलग अलग सेक्टरों मैं उत्तराखंड के ही लाखो लोगो को रोजगार दे रहा है। ओर ये सब कुछ लोकप्रिय महाराज जी के उचित दिशा निर्देश पर हो रहा है ,श्री महाराज जी की आज लगातार बढ़ती लोकप्रियता से ही बौखलाए लोगो का षडयंत्र जारी है ।
सबसे ख़ास बात ये है कि जब इतना सबकुछ गुरु राम राय ट्र्स्ट कर रहा है तो हम ये नही कहते कि कही कभी कबार चूक नही होती होगी या इतने बड़े मिशन मैं अलग अलग जगह सेवाएं देने वाले गलतियां नही करते होंगे।
स्वभाविक सी बात है जहां काम होगा वहा गलतियां भी होगी।
लेकिन इसके बावजूद भी श्री महाराज जी स्वयं सभी अलग अलग मिशन मैं महत्वपूर्ण पदों पर रहने वाले अधिकारी , कर्मचारी ,के साथ लगातार बैठक करते है, वीडियो कॉम्फ्रेस कर मीटिंग लेते रहते है , औचक दौरा करते है ग्राउंड जीरो पर जाते है ,
उचित दिशा निर्देश देते रहते है और यदि कही भी किसी की भी पूरे मिशन के अंदर शिकायत आती है तो स्वयं
जांच टीम गठित कर ओर उसके ऊपर भी एक ओर टीम रख कर ओर उनके पीछे फिर किसी ओर को रख कर पुरी जॉच पड़ताल के बाद गलती पाए जाने पर कोई भी बड़े से बडा मिशन का अधिकारी हो अपने विभाग में या छोटे से छोटा कर्मचारी हो उस पर कार्यवहीं तय हो जाती है।
या तो उनकी तत्काल नियमानुसार सेवाएं मिशन से समाप्त हो जाती है या फिर उनके द्वारा गलती स्वीकार करने पर उनके रोजगार को ना छीनते हुए उनका तबादला कर दिया जाता है।
पर तब जब शिकायत मैं सच्चाई हो, इतना बड़ा मिशन कोई यू ही नही चलता, सब कुछ नियम अनुसार ही होता है और पिछले कुछ सालों से जिस तरह श्री महाराज जी की पड़ताल या जांच मैं जो भी कुछ सच के तथ्यों का निकलना हुवा उन सब पर कार्यवाही हुई।
गुरुरामराय ट्रस्ट का मिशन बड़ा है तो सभी काम करने वाले परफेक्ट तो नही हो सकते ये हम कह सकते है! जिन पर तत्काल एक्शन भी होता है और सब कुछ अच्छे के लिए किया जाता है।
पर जब हर बात के लिए मिशन की , लोकप्रिय श्री महाराज जी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है तो इसे हम षडयंत्र ही कहेंगे।
जो सोशल मीडिया मैं ही स्वयं दिख जाता है।
बहराल इतना ही कहेंगे कि गुरु राम राय मिशन के सभी विभागों , सेक्टरों, मैं एक छोटे से छोटे कर्मचारी से लेकर महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करने वाले सभी स्टाफ को भी कि इसे सिर्फ गुरुरामराय ट्रस्ट ना समझकर अपना माने , अपना स्कूल, अपना अस्पताल, अपनी खेती, अपना चाय का बागीचा ,अपना कालेज , अपना होस्टल मानकर , ईमानदारी से , निष्ठा से अपना कार्य करना चाहिये जो आप मैं से बहुत से करते भी होंगे और कुछ नही भी।
आपका रोजगार भी यही से है और आपका उज्वल भविष्य भी यही से क्योकि हमारे आज से ही कल हमारा भविष्य बनता है।
ओर जब आपके गुरु राम राय मिशन ओर आपके ट्र्स्ट , आपके अस्पताल, ओर श्री लोकप्रिय महाराज जी की छवि को धूमिल करने का षडयंत्र हो तो उसे आप ही बेनकाब कर सकते है कोई दूसरा नही।

जल्द कुछ षड़यंत्र कारियो के ऊपर एक रिपोर्ट ओर आपको पढ़ने को मिलेगी।

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