बहुत प्यार से , जय जय कारे लगाते हुए, हाथ जोड़े हुए आपने सात दिन तक
प्यारा दरबार सजाया, रात-दिन सिर-माथा नवाया, दिल में बैठाया और अगले बरस तू जल्दी आ का जयकारा लगाकर विदा कर दिया । पर, अब ये हाल है  गणपति जी की प्रतिमाओं का विसर्जन के बाद ये बुरा हाल देखना कितना दुखदायी है। तस्वीर बया करती है। कोई बता दे कि गणेश पूजा पंडाल सजाने वाले हजारों लोग अब क्या कहेंगे। क्या करोड़ों लोगों की धर्म-आस्था से जुड़े इस विसर्जन को सुखदायी नहीं बनाया जा सकता। क्या किया जाए जो ऐसा न हो सवाल ये बड़ा है।


दरसल मैं ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। हर बार इस तरह की तस्वीर दिख जाती है
हर साल भक्त श्रृद्धा भाव से गणपति को घर लाते हैं अथवा पंडाल में विराजमान करते हैं। विधि-विधान से पूजन करते हैं। गणपति का मनमोहक भोग लगाते हैं। ओर हाथ जोड़कर खड़े रहते है ओर फिर महोत्सव खत्म होते ही पंडाल से गणपति के विसर्जन की जोरदार तैयारियां करते हैं। विसर्जन के बाद घाटों पर जो दृश्य देखने को मिलता है वह किसी अपराध से कम नहीं है। कूड़े के ढेर में पड़ी गणपति की मूर्ति मन को विचलित कर जाती है हमारी


क्या करें इस अपराध से बचने के लिए क्या हम  प्रतिमाएं छोटी रख सकते है और जल में जल्द घुलनशील तत्वों से बनाई जाने वाली प्रतिमाएं का प्रयोग कर सकते है , अथवा बनाई जा सकती है या भूविसर्जन किया जाए या कुछ और। कुछ भी हो पर उपाय जल्द सोचिए वरना कह दीजिए गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू मत आ।
हमारा मकसद ये है कि भगवान की प्रतिमाओं का हाल इस कदर ना हो


आपको ये ख़बर सही लगे तो इसे वायरल कर दे।
ताकि हमको अगले साल से इस प्रकार की तस्वीर देखने को ना मिले।
है भगवान सबका भला करो।
सबकी मनोकामना पूरी करो।

 



LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here