ये सच है कि उत्तराखंड में डेंगू का डंक लगातार विकराल होता जा रहा है।
ओर राजधानी देहरादून मे ही 800 से अधिक लोगो मैं डेंगू की पुष्टि हो चुकी है तो डेंगू के संदिग्ध मरीज की मौत भी हो गई है दुखद है


सरकारी आकड़ो के अनुसार उत्तराखण्ड में डेगू के मरीजों की संख्या 13 सौ के आंकड़े को पार कर गई है। जो आगे लगतार बढ़ भी रहा है मगर इसके बावजूद भी रोकथाम के सरकारी उपाय विफल साबित हो रहे हैं ये आरोप विपक्ष लगा रहा है
अभी हाल ही मैं दून में जिस युवक की उपचार के दौरान मौत हुई उसकी निजी अस्पताल की जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। तो , स्वास्थ्य विभाग इसकी जानकारी होने से आज भी इन्कार कर रहा था और ये अधिकारी डेथ ऑडिट की बात कह रहे हैं। सूत्र बोलते है कि इस तरह से जिले में अब तक डेंगू के लक्षण वाले आठ मरीजों की मौत हो चुकी है । मगर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सिर्फ यह तीन मौत की पुष्टि कर रहा है।


अभी कुछ दिनों पहले कोरोनेशन अस्पताल के सीनियर फिजिशियन डॉ. एनएस बिष्ट ने प्राइवेट डॉक्टरों एवं पैथोलॉजी लैब के गठजोड़ पर प्रहार किया था। उन्होंने कहा था कि डेंगू को लेकर निजी लैब गलत रिपोर्ट दे रहे हैं। जिसके बाद डॉ. बिष्ट के आरोपों पर आइएमए देहरादून शाखा अध्यक्ष डॉ. संजय गोयल ने बयान दिया था कि प्राइवेट डॉक्टरों पर अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं।
इस पर अब डॉ. एनएस बिष्ट ने पलटवार करते हुए आइएमए अध्यक्ष को खुला पत्र लिखा है। ख़बर है कि जिसमें उन्होंने कहा है, आपकी भ‌र्त्सना का उत्तर लिखते हुए मुझे कतई हर्ष नहीं हो रहा है। मेरे लिए यह फिर से एक डॉक्टर की मौत देखने जैसा है। डॉक्टर कब मरा। कैसे मरा। मरता तो एक रोगी है। मरना तो रोग को था। तीन पन्नों वाले पत्र में आगे भी उन्होंने इसी तरह तंज कसे हैं। बता दे कि देहरादून में डेगू पीड़ितों की संख्या बढ़कर 821 को पार कर रही है , नैनीताल में 423 से अधिक , हरिद्वार में 39 से अधिक , ऊधमसिंह नगर में 26 से अधिक , टिहरी में 13 से अधिक और पौड़ी में एक मरीज को डेंगू का डंक लग चुका है। मतलब सरकारी आंकड़े 1300 से आगे पहुँच गए है पूरे प्रदेश के ।
बता दे कि इससे पहले कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने सरकार पर आरोप लगाया था कि सरकार के पास कोई भी ठीक आंकड़े तक नही डेंगू के मरीज़ों को लेकर ओर पटरी से नीचे उतर चुकी है पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था। भले ही डेंगू के बढ़ते मामले देख स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के पसीने छूट रहे हैं। विभागीय अधिकारियों को सूझ नहीं रहा है कि आखिर इस बीमारी की रोकथाम व बचाव के लिए और क्या उपाय अमल में लाए जाएं। ऐसे में अब महकमा भी मौसम के रुख पर निर्भर है। क्योंकि वातावरण में जैसे-जैसे ठंड बढ़ेगी तो डेंगू की बीमारी फैलाने वाले मच्छर एडीज की सक्रियता भी कम होने लगेगी।
ये डेंगू का डंक साहब जो आम से लेकर खास तक को नही छोड़ रहा है कही भाजपा के नेता हो या कांग्रेस के , या फिर कोई सरकारी अधिकारी , हर कोई
कोई इस मच्छर की चपेट में आने से नहीं बच रहा है। इस बीमारी की रोकथाम व बचाव के लिए भले हिब स्वास्थ्य विभाग व नगर निगम ने सभी तैयारियां की थी पर वे सब नाकाफी साबित हो रही हैं। जानकारी अनुसार
विभागीय टीमों ने मोथरोवाला, बद्रीश कॉलोनी आदि क्षेत्रों का दौरा किया है। इस दौरान 1141 घरों का सर्वे किया गया। इनमें 53 घरों में डेगू मच्छर का लार्वा मिला है, जिसको मौके पर ही नष्ट किया गया। साथ ही लोगों को जानकारी दी गई कि अपने आसपास स्वच्छता बनाए रखें और खाली बर्तनों में पानी जमा नहीं होने दें।


चलिए ये सब तो वो बाते है जो हो रही है या दिखाई दे रही है।
पर आज तो हद ही हो गई।

जब
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना अपनी फेसबुक पर लिखते है कि
जानलेवा डेंगू को लेकर महानिदेशक स्वास्थ्य का घिराव।देहरादून में 50 से ज्यादा लोगों की ले ली है अब तक डेंगू ने जान
( गोर करे 50 से ज्यादा लोगो की डेंगू ने ले ली जान ) अब ये आंकड़े धस्माना जी को किसने दिए या उन्होंने गलती से लिख दिया कि 50 से अधिक लोगो की डेंगू से से गई जान !!?
चुभता हुवा सवाल है ।
इसके आगे धस्माना लिखते है कि
और स्वास्थ्य विभाग व सरकार कर रही आराम। मुख्यमंत्री जो स्वयं स्वास्थ मंत्री हैं और शर्मनाक और अफसोस कि बात यह है कि स्वयं देहरादून की ही डोईवाला सीट से विधायक हैं जब उनके ही जनपद में स्वास्थ्य विभाग के यह हाल हैं तो पूरे पहाड़ की तस्वीर के बारे में आप अंदाजा लगा सकते हैं। देहरादून में डेंगू महामारी का रूप ले रहा है। सरकारी हॉस्पिटलों में जगह नहीं है और निजी हॉस्पिटलों में लूट मची है। सामान्य खून की जांच के निजी पैथोलॉजी लैब 1400 रुपये से लेकर 1800 रुपये तक जांच कर रहे । कौलागढ़ में एक ही घर में तीन चार लोग डेंगू से पीड़ित हैं यही हाल रायपुर इलाके में हर घर में है, रिस्पना से लगी अनेक बस्तियों के यही आलम है, परसों ही गोविंदगढ़ में एक 34 वर्ष का व्यक्ति डेंगू के कारण मर गया। हालात महामारी के न बन जाएं इसलिए आज डीजी हेल्थ का घिराव किया। मुख्यमंत्री जी नींद से जागिये , आपको 57 विधायकों के साथ प्रचंड बहुमत वाली सरकार का मुखिया गुल्ली डंडा खेलने के लिए नहीं बनाया था जनता ने। आप नहीं जागेंगे तो जनता जगाने आएगी ओर उसके बाद अपनी पोस्ट को टैग भी कर देते है

।#मुख्यमंत्रीत्रिवेंद्रसिंहरावत #महानिदेशकस्वास्थ #सीएमओदेहरादून को
बहराल क्या सच मैं डेंगू से 50 लोगो की मौत हो गई ?? या धस्माना जी से गलती मैं ये आंकड़ा लिखा गया ? या फ़िर डेंगू के डंक पर सियासत का भी खूब तड़का पढ़ गया है।
ये जनता तो सब जानती है पर बोलता उत्तराखण्ड का निवेदन है कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना धस्माना से की अगर गलती से 50 लोगो की जान डेंगू से गई है लिखा गया तो उसको बदले। ताकि जनता उत्तराखण्ड की भयबीत ना हो इन आकड़ो को सुनकर।
ओर यदि आपके द्वारा कही गई बात सत्य है तो उसे प्रमाणित करे सर।



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