दुःखद खबर है आपको बता दे कि उत्तराखंड के पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा जी अब हमारे बीच नही रहे सोमवार को उनका निधन हो गया दुःखद
जानकारी अनुसार वे बीमार थे और उनका एक निजी अस्पताल में इलाज चल रहा था।
आपको याद दिला दे कि वे अविभाजित उत्तरप्रदेश की मसूरी विधानसभा के दो बार विधायक रहे थे।
आज उनके निधन पर उनके निकट सहयोगी रहे क्षेत्र के तमाम लोगों , राज्य आंदोलन कारी प्रदीप कुकरेती सहित कही राज्य आंदोलन कारियो ने दुख जताया है। सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी उनके निधन पर गहरा शोक जताया है। उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति एवं दु:ख की इस घड़ी में उनके परिजनों को धैर्य प्रदान करने की कामना की है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पृथक उत्तराखंड के निर्माण में रणजीत सिंह के संघर्षों को सदैव याद रखा जाएगा
बता दे कि पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा के निधन पर उनके क्षेत्र के लोग दुखी हैं।
जानकारी है कि उनका नाम शिक्षा के प्रचार प्रसार और गन्ना राजनीति में बेहद आदर के साथ लिया जाता रहा है।
ये व्यक्ति आजीवन मूल्यों और सिद्धांतों पर चलने वाला था उन्होंने गन्ना राजनीति और डोईवाला में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए बहुत काम किया। वही पृथक राज्य निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले पूर्व विधायक रणजीत सिंह वर्मा का कार्य क्षेत्र की बात करे तो वो डोईवाला रहा। उनकी गन्ना राजनीति में लगभग तीन दशक से भी अधिक समय तक पकड़ रही है। ओर गन्ना परिषद डोईवाला में लगभग उन्होंने 25 सालों तक अध्यक्ष का दायित्व निभाया।  वही जानकार कहते है कि डोईवाला शुगर मिल के पुनर्निर्माण में भी उनका बड़ा योगदान रहा है आज लोग बता रहे है कि एक शिक्षक के रूप में भी उन्होंने काम किया। क्षेत्र के सबसे पुराने पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला के प्रबंधक का काम साल उन्होंने 1966 से 2018 तक निभाया। जबकि आर्य कन्या पाठशाला इंटर कॉलेज के वह अभी तक प्रबंधक बने रहे थे।
वही पृथक राज्य निर्माण के लिए संघर्ष के दौरान उन्होंने डोईवाला समेत पूरे प्रदेश में अलख जगाई। डोईवाला प्रेमनगर बाजार में अपनी ससुराल को भी आंदोलन के केंद्र में रखा। राज्य निर्माण संघर्ष के लिए लोगों को तैयार किया। नतीजा यह निकला कि पर्वतीय क्षेत्रों से देहरादून आने वाले आंदोलनकारियां का ठहराव डोईवाला में होता था। ये जानकारी आज मीडिया साझा कर रहा है। उन्होंने साल 2005 में डोईवाला प्रेमनगर बाजार में स्थापित उच्च शिक्षा के संस्थान दून घाटी कॉलेज ऑफ प्रोफेशनल एजूकेशन के स्थापना में अहम भूमिका निभाई थी
बोलता उत्तराखंड परिवार की तरफ से उनको भावबीनी श्रदांजलि।
इन शब्दों के साथ कि हर कोई रणजीत सिंह वर्मा नही बन सकता।

इनके साथ के कुछ लोग कहते है कि उन्हें इस बात का दुःख हमेशा रहा कि राज्य बनाने के लिए शहीद हुए  उत्तराखण्ड के लालो के क़ातिलों को सज़ा  अब तक नही मिली वे जब भी उस आंदोलन को याद करते थे बस यही कहते थे कि शहीदों हम शर्मिंदा है तुम्हारे कातिल ………





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