बता दे कि आज सुबह से ही अगले 24 घंटे तक देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, पिथौरागढ़, नैनीताल और पौड़ी जिले में भारी से भारी बारिश की चेतावनी मोसम विभाग ने जारी की है
अत्यधिक भारी बारिश को देखते हुए सभी महकमों को अलर्ट किया गया है। बारिश के दौरान लोगों को खतरनाक पहाड़ी रास्तों से बचने की सलाह भी दी गई है।
बता दे कि यमुना और इसकी सहायक नदी टौंस का लगातार जलस्तर बढ़ रहा है। इसके कारण डाकपत्थर डाम से लगातार सभी गेट से पानी छोड़ा जा रहा है। बावजूद, इसके जलस्तर में कोई कमी नहीं आई है। ख़बर है कि यदि इसी तरह यहां जलस्तर बढ़ता रहा तो दिल्ली और हरियाणा के कुछ इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। वही उफान पर सभी नदियां है जिसके चलते अलर्ट पर प्रशासन है ।

वही उत्तराखंड के उत्तरकाशी में मोरी ब्लाक के आराकोट क्षेत्र में शनिवार देर रात बादल फटने से कई लोगों की मौत हो गई दुःखद लगभग दर्जनों मकान पानी के सैलाब में समा गए है कल रविवार देर शाम तक आराकोट और माकुड़ी से आठ लोगों के शव मिल चुके थे।वही अभी इस क्षेत्र में 15 से अधिकलोगों के बहने और मलबे में दबने की जानकारी है
बता दे कि दर्जनों संपर्क मार्ग व पुल बहने से सैकड़ों ग्रामीण अपने गांव-घरों में ही कैद हो रखे है तो पेयजल और बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त होने से मुश्किलें और बढ़ गई हैं। आपदा प्रबंधन टीमें संपर्क मार्ग कटे होने के कारण रविवार देर शाम मौके पर पहुंच पाईं। जिसके बाद राहत-बचाव कार्य शुरू कर दिया गया था। माकुड़ी गांव के गदेरे में आए उफान से कई मकान जमींदोज हो गए। आपदा प्रबंधन दल में शामिल भगत सिंह रावत ने बताया कि माकुड़ी गांव में मलबे में दबे पांच लोगों के शव बरामद हो गए हैं। इनकी पहचान चतर सिंह , कलावती, , ऋतिका , सरोजनी देवी के रूप में हुई है। जबकि माकुड़ी गांव से जोगड़ी देवी (75) पत्नी कुंदन सिंह और नेपाली मूल के लाल बहादुर लापता हैं।
वही जानकारी अनुसार
उन्होंने बताया कि आराकोट में सोमा देवी , नेपाली मूल के कालूराम , और सोबित , के शव बरामद हुए हैं। यहां से राइंका आराकोट में प्रवक्ता बिजनौर निवासी बृजेंद्र कुमार व उनकी पुत्री संगीता के भी बाढ़ में बहने की सूचना है। आपदा प्रबंधन की टीम अन्य गांवों तक पहुंच कर आपदा में हताहत हुए लोगों को रेस्क्यू करने और उनकी जानकारी जुटाने में लगी हुई है।जो आज सुबह से फिर जुट गई है। वही हिमाचल प्रदेश की सीमा पर स्थित मोरी उत्तरकाशी के सनेल गांव में कोठीगाड़ खड्ड में लगे स्टोन क्रशर में काम करने वाले तीन डंपर एवं दो जेसीबी मशीनों समेत कुछ मजदूरों के भी बाढ़ में बहने की सूचना है। तो दर्जन से अधिक मवेशी भी अभी तक बह चुके है।
वही उत्तराखंड के चमोली जिले में लगातार हो रही बारिश के बाद हुए भूस्खलन से बदरीनाथ हाईवे नंदप्रयाग, क्षेत्रपाल, पीपलकोटी, लामबगड़ और कंचन गंगा में बंद हो गया है जिससे बदरीनाथ धाम में 800 से अधिक तीर्थयात्री रोके गए हैं जबकि प्रशासन की ओर से बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जा रहे तीर्थयात्रियों को भी जोशीमठ, पांडुकेश्वर और गोविंदघाट में सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया है।


आज 11 जिलो मैं बंद है स्कूल
बारिश के भारी अलर्ट के बीच देहरादून, में जिलाधिकारी ने आज छुट्टी की घोषणा की है। इस दौरान सभी निजी और सरकारी स्कूल (12वीं तक) बंद रहेंगे। इसके अलावा सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को भी बंद रखने के आदेश जारी हुए हैं।
इसी तरह उत्तरकाशी, पौड़ी , चमोली, टिहरी , हरिद्वार ,चंपावत ,नैनीताल, पिथौरागढ़, चंपावत, बागेश्वर और अल्मोड़ा के जिला अधिकारियों ने कहा कि मोसम विभाग के पूर्व अनुमान के चलते आज जिले में कक्षा एक से 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहेगे ।
अभी तक कुमाऊं में मलबे और बोल्डरों से 31 सड़कें बंद हैं। नैनीताल में 8, बागेश्वर में 11, चंपावत और पिथौरागढ़ में 10-10 और अल्मोड़ा में चार सड़कें बंद हैं। वही मुनस्यारी के धापा गांव में पहाड़ी से बोल्डर, मलबा गिरने से गांव के 24 परिवार खतरे में हैं। इनमें से 4 परिवार कुछ दिन पहले से टैंटों में रहने लगे थे। शेष 20 परिवारों को रविवार को सहकारी समिति के भवन में शिफ्ट किया गया है। वही बता दे कि एसडीएम बड़कोट एवं एसओ मोरी आराकोट पहुँच चुके थे और नेशनल हाईवे नोटाधार मार्ग खोला जा चुका है तो वही पंचनालू से जेसीबी आराकोट की ओर भिजवा दी गई है। आज प्रभावित क्षेत्रों में सभी प्रकार की आवश्यक सामग्रियां 12 बजे से पहले उपलब्ध करा दी जाएगी वही आज सचिव आपदा अमित नेगी एवं आईजी संजय गुंज्याल द्वारा प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया जाएगा मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत स्वयं कल देर रात तक आला अफसरों से पुरी जानकारी लेते रहे।
उन्होंने आपदा ग्रस्त क्षेत्रो मैं हर प्रकार से जनता को तत्काल खान पान से लेकर मूल सुविधा देने के निदेश कल ही दे दिए थे।
ओर सुबह भी अफसरों को फोन कर निर्देश दिए है कि जितना भी संभव हो सके इस मौसम मैं जल्द से जल्द बंद पड़ी सड़को को युद्ध स्तर पर खोला जाए, आपदा वाले क्षेत्रों मैं दवाई , खान पान , बिजली ,पानी की व्यवस्था तत्काल हो ।सभी महकमे के विभागों का आपस मैं सटीक तालमेल बना रहे।



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