मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि पूर्व विदेश मंत्री रही सुषमा जी हमारी बहुत ही वरिष्ठ नेता थी वह अपने छात्र जीवन से ही विचारधारा से जुड़ी थी और लंबे समय तक उन्होंने देश के लाखों कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया वे एक प्रखर वक्ता थी और चिंतक भी उनकी जो भाषा शैली थी उससे हर कोई प्रभावित था, उनका सम्मान करता था
फिर चाहे विदेश मंत्री के नाते, दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री के नाते, ओर अलग अलग पदों पर रहकर उन्होंने देश की सेवा की।
यहा तक कि कई बार जो हमारे नोजवान जो विदेशों में रहते है या रह रहे थे जिन्हें फसा दिया जाता था तो हम सुषमा जी को यहा से संदेश कर देते थे और फिर आगे की कार्रवाई प्रारंभ हो जाती थी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने देश में हिंदी भाषा के लिए बहुत बड़ा काम किया।
महज 20 साल की उम्र से ही उनकी प्रतिभा दिखने लग गई थी कम उम्र में ही वह विधायक बन गई ,मंत्री बन गई ,
और जिस अनुछेद 370 को हटाने के लिए ,जहां देश के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान हुआ जिन्होंने पार्टी को आगे बढ़ाया वह अनुछेद 370 अब समाप्त हुई ।


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने कहा कि उन्होंने जो अंतिम ट्वीट किया उसमें लिखा था कि प्रधानमंत्री जी आपका हार्दिक अभिनंदन मैं अपने जीवन मैं इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी
उन्होंने 370 समाप्त होने पर प्रधानमंत्री जी का धन्यवाद किया उनका अभिनन्दन किया और फिर दुःखद खबर कल आई कि वह हम सब को छोड़ कर चली गई यह बहुत कष्ट दायक है खासकर मेरे लिए भी मे बहुत दुखी हूं ।
मैंने उनके साथ बहुत काम किया उनके साथ जाने का मौका भी खूब मिलता था मैं उनको दीदी कहता था ।व्यक्तिगत रूप से मेरे लिए , राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा दुःख है आज पूरे देश की आँखे नम है ।


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र ने बताया कि उत्तराखण्ड राज्य बनने के बाद वह पहली राज्यसभा सांसद थी।पर अब देखो वोब हमारे बीच में नहीं रही। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत उनकी अंतिम यात्रा मैं शामिल होने दिल्ली गए थे जहा उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री को भावभीनी श्रदांजलि दी और उनकी अंतिम यात्रा मैं शामिल हुए इस बीच मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत भावुक भी हुए ।


उत्तराखण्ड राज्य बनने के पहले से ही उनका देवभूमि के प्रति गहरा लगाव था , उनका महत्वपूर्ण योगदान है, स्वर्गीय अटल जी के साथ स्वास्थ्य मंत्री रहते हुए उन्होंने एम्स के बनाने की पहल की । आज उत्तराखण्ड का एम्स भी उन्हीं मैं से एक है।


मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत ने कुछ उन बातों को भी याद किया उन पलों को भी याद किया जब उत्तराखण्ड राज्य नही बना था वो दौर साल 93 ,94 का था मेरे पास रेलिया कराने की जिमेदारी थी और हमने सुषमा जी की 4 सभाएं रखी थी ।
पहले बिजनोर , फिर कोटद्वार , ऋषिकेश होते हुए देहरादून मैं उनकी जनसभा थी आप कल्पना कर सकते हैं कि उस समय बाय रोड आना और चार जनसभा करना ओर बिल्कुल भी चेहरे पर थकान नही ये उनका पार्टी के कार्यकर्ताओं के प्रति प्रेम , समर्पण, ही था उस बीच मेने उनको कहा था कि दीदी आप आराम कर लो थक गए हों तो वे बोली कि नही भैया हमारा कार्यकर्ता खुश होता है।


ये हमारा काम है मतलब वे सबको साथ लेकर चलने वाली, सबको एकजुट रखने वाली थी ।और उसी रात फिर
उनको मसूरी ट्रेन से जाना था उस समय यही ट्रेन चला करती थी ये बात साल 1993 , 94 की है उस समय पार्टी में कार्यकर्ताओं की कमी थी, ओर संसाधनो की भी तो उस दौर मैं
कुछ गिने-चुने परिवार थे जिनके पास गाड़ी हुआ करती थी, तो कुछ लोग ही उलब्ध करा पाते थे


उस समय एक नई नई अच्छी गाड़ी आई थी मैं एक नए व्यक्ति से वो गाड़ी को लेकर आया था।उस समय कुछ लोगों को अच्छा भी नहीं लगा था कि नया कहां से आ गया ये गाड़ी कहा से आगई फिर जब मैं उन्हें गाड़ी से रेलवे स्टेशन तक छोड़ने गया तो उन्होंने मेरी पीठ थपथपाई कहा चल तूने एक नया जोड़ा है लोग बोलते हैं उसकी परवाह नहीं करते नया जुड़ता है तो खुश होना चाहिए कुल मिलाकर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत का कहना था कि वेव हमेशा सबको एक साथ जोड़कर चलने की सिख देती थी, कार्यकर्ताओ को जोड़ कर रखने की बात हो या उनका हौसला अफजाई करने की बात , वो बहुत कुछ हमको सीखा कर दुनिया को अलविदा कह गई दुःखद

वही आज पूर्व विदेश मंत्री एवं बीजेपी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का अंतिम संस्कार लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में कर दिया गया। इस दौरान पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह , उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत समेत विभिन्न दलों के नेता मौजूद थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया और कहा कि भारतीय राजनीति के एक गौरवशाली अध्याय का अंत हो गया। पीएम मोदी ने ट्वीट किया, ‘भारतीय राजनीति में एक गौरवशाली अध्याय का अंत हो गया। भारत एक असाधारण नेता के निधन से शोकसंतप्त है, जिन्होंने जनसेवा और निर्धनों के जीवन में सुधार के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। सुषमा जी अपने आप में अलग थीं और करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत थीं।
बता दे कि सुषमा स्वराज के अंतिम संस्कार की रस्म उनकी बेटी बांसुरी ने पूरी की । ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएट बांसुरी स्वराज दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस करती हैं. सुषमा स्वराज के अंतिम संस्कार के दौरान पति स्वराज कौशल भी मौजूद थे.


बता दे कि स्थापित मान्यताओं के विपरीत जाकर सुषमा की बेटी बांसुरी स्वराज ने अंतिम संस्कार की सभी रस्में पूरी की और इसके बाद दिल्ली के लोधी रोड स्थित शवदाह गृह में उनका अंतिम संस्कार किया गया.
बांसुरी सुषमा की एकमात्र संतान हैं और उन्होंने ही उनके अंतिम संस्कार के सभी रस्मों को पूरा किया.
रुढ़िवादी भारत में जहां बेटे या पति के हाथों अंतिम संस्कार संपन्न कराया जाता है, लेकिन सुषमा स्वराज के अंतिम संस्कार की सभी रस्में उनकी बेटी द्वारा पूरी की गईं ।
हम कह सकते है कि बेटी के हाथों कर्मकांड ओर इलेक्ट्रिक शवदाह, अंतिम यात्रा में भी बड़ा संदेश दे गईं सुषमा स्वराज ।

 



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