जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरु

देहरादून। जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम भारतीय वानिकी अनुसंधान संस्थान में शुरु हुआ। इस कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् की उपमहानिदेशक डाॅ. नीलू गेरा (अनुसंधान) ने कहा कि जलवायु परिवर्तन भारत जैसे विकासशील देशों में बड़ी चुनौती है क्योंकि भारत दुनिया में जलवायु परिवर्तन के प्रति अति संवेदनशील है।
डाॅ. नीलू गेरा ने कहा कि विश्व के बदलते परिदृश्य में जलवायु परिवर्तन के न्यूनीकरण हेतु वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है। विकासशील देशों के लोग जलवायु परिवर्तन के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं, क्योंकि उन पर जलवायु परिवर्तन का विपरीत प्रभाव पड़ना अवश्यंभावी है। जलवायु परितर्वन के समाघात से भारत पर अत्यन्त विपरीत प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि इससे देश की खाद्य एवं जल आपूर्ति की व्यवस्था बाधित होगी। वनीकरण और पुनर्वनीकरण जैसे वानिकी क्रियाकलापों से जलवायु परितर्वन में कमी लाई जा सकती है किन्तु प्राकृतिक संसाधनों का स्थाईत्व, अनुकूलन का मुख्य कारक सिद्ध होगा। पहले तकनीकी सत्र में वी.आर.एस. रावत सहायक महानिदेशक, जैव विविधता एवं जलवायु परिवर्तन, भा.वा.अ.शि.प. ने जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण तथा अनुकूलन रणनीतियों के बारे में बताया उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में जलवायु परिवर्तन वैश्विक विचार-विमर्श के मुख्य विषयों में से एक रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश में जलवायु परिवर्तन मुख्य चुनौती है तथा वनों की जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. बंद्ययोपाध्याय ने कृषि क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण तथा अनुकूलन करके कार्यक्रमों पर प्रकाश डाला। भा.वा.अ.शि.प. द्वारा 19 से 23 फरवरी तक सरकारी क्षेत्र में जलवायु परितर्वन एवं कार्बन न्यूनीकरण पर कार्यरत वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों के लिए पांच दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में देश में विभिन्न सरकारी वैज्ञानिक संगठनों तथा विश्वविद्यालयों के तेइस वैज्ञानिक भाग ले रहे है।। प्रशिक्षण कार्यक्रम को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार द्वारा ‘‘सरकारी क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकीविदों के राष्ट्रीय कार्यक्रम’’ के तहत प्रायोजित किया गया है। डाॅ. आर.एस. रावत ने उद्घाटन सत्र का संचालन किया  और धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया। उद्घाटन सत्र में डाॅ. एस.डी. शर्मा निदेशक अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग, भा.वा.अ.शि.प., डाॅ. संजय सिंह वैज्ञानिक, भा.वा.अ.शि.प. उपस्थित रहे।

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