उत्तराखण्ड में सेवा का आयोग की रफ्तार धीमी

आयोग ने शासन से की आर्थिक दंड देने के अधिकार की मांग
देहरादून । देश के दूसरे कुछ राज्यों के साथ सेवा का अधिकार आयोग के साथ ही हुई थी। दूसरे राज्य तो अपने मकसद में आगे बढ़ते रहे लेकिन उत्तराखंड में सेवा का अधिकार आयोग की रफ्तार सीमित अधिकारों की वजह से बेहद धीमी ही रही है।
आयोग के कमिश्नर डीएस गब्र्याल ने बताया कि उत्तराखंड में सेवा का अधिकार आयोग को प्रभावी और गुड गवर्नेंस में भागीदार बनाने के मकसद से आयोग ने शासन में आर्थिक दंड देने के अधिकार दिए जाने की मांग की गई है। उत्तराखंड सरकार ने कैबिनेट में फैसला लेते हुए सेवा का अधिकार आयोग में सेवा देने वाले विभागों की लिस्ट बढ़ाने का फैसला तो किया है, लेकिन सीमित अधिकारों की वजह से आयोग प्रभावी असर डालने में कहीं न कहीं अन्य राज्यों से पिछड़ रहा है। आयोग को उम्मीद है कि अगर जन सुनवाई के दौरान दोषियों पर जुर्माना लगाने का अधिकार आयोग को मिल जाये, तो आयोग ज्यादा प्रभावी साबित हो सकता है। सेवा का अधिकार आयोग का मकसद है प्रदेश के सरकारी विभागों में जनता के अधिकारों की रक्षा करना है, इसके लिए इस वक्त 18 विभाग आयोग में शामिल हैं। आयोग में जन-शिकायतों में सबसे ज्यादा शिकायतें शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण जैसे विभागों की होती है। लिहाजा आयोग का मानना है कि अगर अन्य आयोगों की तरह सरकार इस आयोग को भी जुर्माना लगाने का अधिकार दे देती है। तो सरकारी विभागों में आयोग की भूमिका ज्यादा असरदार साबित हो सकती है।

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